For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

स्वार्थ नें राष्ट्र की है सजाई चिता-----ग़ज़ल

212 212 212 212

स्वार्थ नें राष्ट्र की है सजाई चिता

जाति की अग्नि से चिट चिटाई चिता

भारती माँ तड़प कर कराहे सुनो

पूछती जीते जी क्यूँ सजाई चिता?

प्रीत के व्योम पर द्वेष धूम्राक्ष है

लोभियों नें वतन की जलाई चिता

राजगद्दी के लोभी हैं शामिल सभी

पूछिए मत कि किसनें लगाई चिता?

आग है जो लगी आप जल जाएंगे

बढ़ के आगे न यदि जो बुझाई चिता

मौलिक अप्रकाशित

Views: 461

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on May 15, 2018 at 5:57pm

आदरणीय नवीन सर सादर आभार

Comment by Naveen Mani Tripathi on April 17, 2018 at 9:50pm

वाह क्या खूब लिखा । हार्दिक बधाई आदरणीय ।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on April 8, 2018 at 1:51pm

आदरणीय ब्रजेश जी हार्दिक आभार

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 8, 2018 at 1:40pm

बहुत ही खूब ग़ज़ल कही है आदरणीय..सादर

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on April 6, 2018 at 9:02am

आदरणीय रामअवध जी आपका सुझाव वास्तव में अच्छा है, सादर आभार

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on April 6, 2018 at 9:02am

आदरणीय वसन्त सर बहुत आभार

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on April 6, 2018 at 9:01am

आदरणीय बाऊजी सादर प्रणाम, सुझाव के अनुरूप प्रयास होगा।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on April 6, 2018 at 9:01am

आदरणीय तेजवीर सर बहुत बहुत आभार

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on April 6, 2018 at 9:01am

आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत आभार

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on April 6, 2018 at 5:06am
आदर्णीय पंकज कुमार मिश्रा जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है वर्तमान माहौल पर अच्छे शेर कहे हैं। बधाई । मेरे विचार से अन्तिम शेर में यदि
'आग है जो लगी देश जल जायेगा, कर लिया जाये तो शेर में व्यापकता आ सकती है।सादर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sanjay Shukla replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदारणीय समर कबीर सर, क्या 4 को यूँ कहा जा सकता है ?....जागे तो गर्द-ए-पाँव ने हैरान कर दिया हम नींद…"
2 minutes ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदाब, जनाब तस्दीक अहमद  खान साहब, खूबसूरत ग़ज़ल हुई है ।बधाई आप को  ! परन्तु  छठे…"
5 minutes ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"bahut bahut shukriya Aapka "
51 minutes ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"    आपके तथ्यों के प्रति सादर भाव रखते हुए इतना ही जानना चाहूँगा, हिन्दी भाषा का व्याकरण…"
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"जनाब भाई लक्ष्मण जी, ग़ज़ल का सफल प्रयास किया है आपने जिसके लिए बहुत बहुत बधाई l आपके शेर 2 में…"
1 hour ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"प्रिय संजय जी आपको ग़ज़ल अच्छी लगी, मेरा उत्साह बढ़ा .आभार "
1 hour ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"चेतन प्रकाश जी बहुत बहुत धन्यवाद "
1 hour ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आद . धामी जी सराहना और उत्साह वर्धन का आभार "
1 hour ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"भाई लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी आपकी ग़ज़ल पर धुआँ पर अच्छी चर्चा चली।इसके "धुएँ" की चपेट…"
2 hours ago
Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीया ऋचा यादव जी नमस्कार। आपने बहुत सुंदर बदलाव किए हैं।सर् के कहे अनुसार एक शेर और ठीक करने से…"
2 hours ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"यह सही है कि भारतेन्दु युग से लेकर हजारी प्रसाद द्विवेदी और आधुनिक काल तक भाषाई  सलिल प्रवाह…"
2 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-135
"आदरणीय कबीर जी, जी ठीक है, फिर कोशिश करूँगी,बहुत शुक्रियः आपका सादर।"
2 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service