For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रंगों से सराबोर गीली साड़ियों से लिपटी कुछ ग्रामीण मज़दूर महिलायें टोली में गली से गुजरीं।


"उधर देखो और बताओ कि उनके अंग-अंग रंगीन हैं या वस्त्र?" एक रंगीन मिज़ाज पुरुष ने अपने साथी से कहा।


"वस्त्र गीले और रंगीन हैं और अंग सूखे और रंगहीन! समझ में नहीं आता तुम्हें?" साथी ने उसकी आंखों के सामने चुटकी बजाते हुए कहा।


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 374

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on February 21, 2018 at 4:05pm

 मेरी इस नवीन लघुकथा पर समय देकर अनुमोदन और विचार साझा करते हुए हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब,  जनाब शरद सिंह ' विनोद' साहिब और जनाब विजय निकोरे साहिब।

Comment by vijay nikore on February 21, 2018 at 2:25pm

वाह। कुछ ही शब्दों में इतनी सच्चाई कह दी.... रचना बहुत ही अच्छी लगी।

दिल से बधाई आपको भाई शेख शहज़ाद उस्मानी जी ।

Comment by SHARAD SINGH "VINOD" on February 21, 2018 at 2:07pm

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी सादर बधाई...

           आपने दो अलग व्यक्तित्व का दो पंक्तियों में ही सार्थक विश्लेषण किया ........ गागर में सागर ..पुन: बधाई!!

Comment by Mohammed Arif on February 21, 2018 at 10:17am

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                          लोगों की दृष्टि ख़राब होती है तो फिर वे बेबसी या लाचारी से सिकुड़े बदन को नहीं देखते । वासना के भेड़िये किसी की मज़दूर की ग़ुर्बत नहीं जानते । बहुत ही कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया आपने । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"और हां.... सादर प्रणाम, आनंदातिरेक, आदरणीय क्षमा करें, औपचारिकता भूल गया था, सादर..  ! "
2 hours ago
Chetan Prakash commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है, मज़ा गया! ! आदरणीय लगता है, छठे शे'र में, 'चितवन' के बजाए…"
2 hours ago
Chetan Prakash commented on सालिक गणवीर's blog post मंज़िल की जुस्तजू में तो घर से निकल पड़े..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"अच्छी ग़ज़ल हुई, सलक गणवीर सिंह , आदाब ! बस एक सुझाव दे सकता हूँ, वो ये कि मतले के ऊला में…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, बहतरीन अशआर पर उम्द: ग़ज़ल हुई है शे'र दर शे'र दाद के…"
7 hours ago
Rachna Bhatia commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"आदरणीय समर कबीर सर् नमस्कार।सर्, लाजवाब ग़ज़ल कही आपने। यह बार बार पढ़ने वाली ग़ज़ल है ।सर्,…"
10 hours ago
Rachna Bhatia commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-है कहाँ
"आदरणीय अमीरुद्दीन'अमीर'जी नमस्कार। अच्छा सुझाव है। आभार। बस..एक बार समर कबीर सर् की…"
10 hours ago
Dharmendra Kumar Yadav commented on Dharmendra Kumar Yadav's blog post एक सजनिया चली अकेली
"आप जैसे वरिष्ठ शायर द्वारा उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
11 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post आत्म घाती लोग - लघुकथा -
"हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।"
11 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on Samar kabeer's blog post 'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'
"हार्दिक बधाई आदरणीय समर कबीर साहब जी। लाजवाब ग़ज़ल सफ़र प जाने से पहले ये सोचना है हमेंहर एक गाम प…"
11 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

मौसम को .......

मौसम को .....सुइयाँ अपनी रफ्तार से चलती रहीं समय घड़ी के बाहर खड़ा खड़ा काँपता रहा मौसम समय के काँधे…See More
12 hours ago
Samar kabeer posted a blog post

'कि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाए'

ग़ज़ल1212 1122 1212 22 / 112यही समाज की उलझन है क्या किया जाएकि भाई भाई का दुश्मन है क्या किया जाएहर…See More
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आजकल इस देश में-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। पुनः उपस्थिति और मसविरे के लिए आभार ।"
12 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service