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गीत - आरज़ू

अंजाने से सपने, अंजानी राह है,
पाना है तुझको ही, यह मेरी चाह है,
तेरे बिना ऐसे कैसे मैं जियुं,
चाहता हूँ साथ तेरे मैं रहूँ,
पूरी कर दे तू मेरी यह आरज़ू,
पूरी कर दे तू मेरी यह आरज़ू.


1} खोकर सब अपनो को, तेरे पीछे चला,
गिरकर फिर उठने का. लाऊँ कैसे हौसला,
ज़ख़्मो को आज मैं भर दूँ ,
जो तू मुझसे कहे वो कर दूँ ,
पूरी कर दे तू मेरी यह आरज़ू,
पूरी कर दे तू मेरी यह आरज़ू.

2} औरों से पूछा, तेरा पता है कहाँ,
तरसूं अब मिलने को, तेरा ठिकाना है कहाँ,
अब मेरा यकीन तू करले,
बाहों मे तू मुझको भर ले ,
पूरी कर दे तू मेरी यह आरज़ू,
पूरी कर दे तू मेरी यह आरज़ू.

 - मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by M Vijish kumar on February 6, 2018 at 7:07pm
Comment by नाथ सोनांचली on January 29, 2018 at 5:20am

आद0 विजिश कुमार जी सादर अभिवादन।बढ़िया गीत लिखा आपने,  हमारी कोटिश बधाई आपको, इस प्रस्तुति पर।

Comment by M Vijish kumar on January 28, 2018 at 8:19pm

आदरणीय Mohammed Arif जी  आपका हृदय से धन्यवाद 

Comment by Mohammed Arif on January 28, 2018 at 7:55am

आदरणीय विजीश कुमार जी आदाब,

                  बहुत ही अच्छा प्रेम गीत । बेहतरीन पंक्तियाँ । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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