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मेरी जिन्दगी में इतने झमेले ना होते
गर तुम मेरे जज्बातों से खेले ना होते ,


बहुत पर खुशनुमा थी मेरी यह जिन्दगी
गर दिखाए हसीं- ख्वाबों के मेले न होते ,


रफ्ता-रफ्ता चल रहा था कारवां जिन्दगी का
दुनिया की इस महफिल में हम अकेले न होते ,


''कमलेश'' ना लुटता दिले- सकूं मेरा कभी
गर मेरी नजरों के सामने ,तेरे हाथ पीले ना होते ,


हमेशा ही कहर बरपा है इश्क पर जमाने का
राहें फूलों की होती कांटे भी न नुकीले होते

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 7, 2010 at 12:14pm
बढ़िया है कमलेश भैया, राणा भाई हमेशा अच्छी राह दिखाते है, थोडा एडिट कर लीजिये , रचना मे चार चाँद लग जायेंगे ,
Comment by कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा on July 6, 2010 at 10:41pm
SHUKAR HAI ISHWAR KA KISI NE YH JAHMAT TO UTHAYI ..KI MERI GALTIYON KA SUDHAR HO ..YE AAP KI NASIHAT PAR AMAL KARNA MERE BAS ME SHAYAD NAHI HAI ..KYONKI URDU BHASHA KA POORA GYAN NAHI HAI ..IS LIYE IN GALTIYON KO DDOR KARNE ME HAMESHA HI KAMJOR PATA HOON ..AAP MERI GAJAL KO SAHI KARNE ME MADAD KAREN ...REQUEST HAI

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on July 6, 2010 at 10:23pm
जितना जानता हूँ उस हिसाब से इमानदाराना राय पेश कर रहा हूँ

**मेरी जिन्दगी में इतने झमेले ना होते
गर तुम मेरे जज्बातों से खेले ना होते ,

बहुत खूब...बहुत सुन्दर.मतला..... दूसरे मिसरे में रवानी थोड़ा सा कम है
तुम मेरे (तुम्मेरे) यहाँ पर "सकता" है

**बहुत पर खुशनुमा थी मेरी यह जिन्दगी
गर दिखाए हसीं- ख्वाबों के मेले न(ना) होते

सुन्दर अल्फाज़....सुन्दर शेयर........पुनः दूसरे मिसरे में आपकी नज़रेसानी की दरकार है

**रफ्ता-रफ्ता चल रहा था कारवां जिन्दगी का
दुनिया की इस महफिल में हम अकेले न(ना) होते ,

गहरी सोच... गहरे विचार....परन्तु रवानी(गेयता) जाती हुई

**''कमलेश'' ना लुटता दिले- सकूं मेरा कभी
गर मेरी नजरों के सामने ,तेरे हाथ पीले ना होते ,

काफी दर्द झलकता है इस शेयर में...........इस शेयर में आपका नाम है(तखल्लुस नहीं कहूँगा)..अतः यह सबसे अंत में होना चाहिए
और एक बेहद ही टेक्नीकल बात ....... आपका काफिया........:झमेले :खेले :मेले :अकेले:..इसके बाद .......पीले...... जमा नहीं. आशा है आप समझ गए होंगे

**हमेशा ही कहर बरपा है इश्क पर जमाने का
राहें फूलों की होती कांटे भी न नुकीले होते(नुकीले ना होते)
सुन्दर शेयर......लाजवाब...रदीफ़-काफिया उलटे लगे है. और वही इसके ऊपर वाली काफिये वाली बात अखरती है...(नुकीले)

कुल मिलाकर एक सुन्दर ग़ज़ल लिखने का प्रयास है.....भावनाएं सामने दिखाई देती है...थोड़ा सा रवानी और विन्यास की कमी दूर करने से उत्कृष्ट ग़ज़ल कही जा सकती है
आशा है मेरे सुझावों को आप अन्यथा नहीं लेंगे
धन्यवाद

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