For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरे घर, मेरे शहर, मेरे लफ्जों को
एक आहट सी लगी,
कि कोई उन्हें छूकर चला गया.. 

वो ठंडी सी छुवन, 
एक भंवर सी कम्पन... 
लगा पहाड़ों से कोई 
मंदाकिनी आ गयी.. 
लगा मेरे लफ्जों को, 
एक आवाज सी मिल गयी.. 
जैसे मेरे गीतों को, 
कोई छूकर चला गया... 

उन्हें कहें भी,
क्या कहें..
किस हक़ से कहें ?
कि दीदार तो जरूरी था..
इन्तजार तो जरूरी था,
या वो ऐतबार भी जरूरी था.. 
जैसे मेरा कोई अपना हो,
जो छूकर चला गया... 

चलो मान ली बातें तुम्हारी,
सुन ली शिकायतें सारी.. 
लफ्ज,अल्फाज भी सब तुम्हारे,
किरदार भी तुम्हारे..
वो दिन, वो रात, वो मौसम, 
फासले, नजदीकियां..
फिर भी साँसों को मेरी, 
कोई छूकर चला गया..

वो तुम थी....

"मौलिक और अप्रकाशित"

Views: 515

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 13, 2017 at 9:41pm

आदरणीय गौनिया जी , अच्छी कविता हुई है , बधाइयाँ । आ. समर भाई जी की बातों से सहमत हूँ ।

Comment by Mohammed Arif on September 12, 2017 at 2:35pm
प्रिय बीएस गौनिया जी आदाब, अच्छी रचना । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें ।
Comment by BS Gauniya on September 12, 2017 at 11:09am

 आभार 

Comment by Mahendra Kumar on September 11, 2017 at 8:34pm

अच्छी भावाभिव्यक्ति है आ. बीएस गौनिया जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए और आ. समर सर की बातों का संज्ञान लीजिए. सादर.

Comment by Samar kabeer on September 11, 2017 at 7:29pm
जनाब बीएस गौनिया जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
'वो तुम थी' को "वो तुम थीं" कर लें ।
'लफ़्ज़ अल्फ़ाज़ भी सब तुम्हारे'
इस पंक्ति में 'अल्फ़ाज़'शब्द 'लफ़्ज़'का बहुवचन है, इसलिये ये पंक्ति यूँ होना चाहिये "अल्फ़ाज़ भी सब तुम्हारे"।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . प्यार

दोहा सप्तक. . . . प्यारप्यार, प्यार से माँगता, केवल निश्छल प्यार ।आपस का विश्वास ही, इसका है आधार…See More
5 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, उत्साहवर्धन व स्नेह के लिए आभार।"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
yesterday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service