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तुम्हारी कसम ...

तुम्हारी कसम ...

सच
तुम्हारी कसम
उस वक़्त
तुम बहुत याद आये थे
जब
सावन की फुहारों ने
मेरे जिस्म को
भिगोया था

जब
सुर्ख़ आरिज़ों से
फिसलती हुई
कोई बूँद
ठोडी पर
किसी के इंतज़ार में
देर तक रुकी रही

जब
तुम्हारे लबों के लम्स
देर तक
मेरे लबों से
बतियाते रहे

जब
घटाओं की
कड़कती बिजली में
मैं काँप जाती

जब
बरसाती तुन्द हवाओं से
चराग़ बुझ कर
मुझे तन्हा
कर जाते

जब
सहर के वक्त
बिस्तर पर
न कोई सलवट होती

बिखरे गज़रे के फूल होते

जब
तारीकियों में
हर आहात खामोश हो जाती
बस
होती थी तो
जिस्म में
शेष बची साँसों की तरह
इक इक सांस पे
रुकी हुई बरसात की
टपकती हुई
इक इक बूँद की
टप टप की आवाज़
जो
मेरी हर कसमसाहट को
अंगारों की तड़प दे जाती
सच
तुम्हारी कसम
उस वक्त तुम
मेरे तसव्वुर की चौखट पर
बिना दस्तक आये थे
मैं
कुछ कह न सकी
बस
भीगती रही , भीगती रही
बरसती बारिश में
तुम्हारी आगोश के
इंतज़ार में
इक इक पल
भीगता रहा
उस वक़्त
हाँ
उस वक़्त
कसम से
तुम बहुत याद आये थे

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 615

Comment

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Comment by Sushil Sarna on June 25, 2017 at 2:40pm

आ.डॉ. गोपाल जी भाई साहिब आपके मुखारविंद से निकली इस काव्यात्मक प्रशंसा का  हार्दिक आभार सर। 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 23, 2017 at 10:36pm

अब क्या मिसाल दूं मैं  तुम्हारे शबाब की ----- सादर .

Comment by Sushil Sarna on June 20, 2017 at 5:50pm

आदरणीय नरेंद्र सिंह जी सृजन को अपनी मधुर प्रतिक्रिया से अलंकृत करने का हार्दिक आभार। कुछ अपरिहार्य कारणों से प्रत्युत्तर में विलम्ब के लिए क्षमा चाहूंगा। 

Comment by Sushil Sarna on June 20, 2017 at 5:49pm

आदरणीय सोमेश कुमार जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने हेतु आपका तहे दिल से शुक्रिया। कुछ अपरिहार्य कारणों से प्रत्युत्तर में विलम्ब के लिए क्षमा चाहूंगा। 

Comment by narendrasinh chauhan on June 16, 2017 at 4:38pm

वाह, लाजवाब रचना 

Comment by somesh kumar on June 16, 2017 at 2:51pm

तुम्हारी कसम 
उस वक्त तुम 
मेरे तसव्वुर की चौखट पर 
बिना दस्तक आये थे 
मैं 
कुछ कह न सकी 
बस 
भीगती रही , भीगती रही 
बरसती बारिश में 
तुम्हारी आगोश के 
इंतज़ार में 
इक इक पल 
भीगता रहा 
उस वक़्त 
हाँ 
उस वक़्त 
कसम से 
तुम बहुत याद आये थे

bhut ghre tk utrte hue ahssas 

bhig gya mn aa gyi yaad

thanks  for sharing such a deep meaningful creation !

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