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तरही ग़ज़ल (कुछ नही है हाथ मे बस फ़लसफ़ा रोशन करें)

बह्र 2122 2122 2122 212

ज़िन्दगी की राह मुश्किल हौसला रोशन करें
हर गली हर रास्ते पर हम दिया रोशन करें ||

ऐ ख़ुदा बर्कत की ख़ातिर भेज दे महमाँ कोई
अपने दस्तर ख़्वान पर हम ये दुआ रोशन करें ||

हुस्न वाले भी निखर जायेंगे मोती की तरह
गर नुमाइश छोड़ कर शर्म-ओ-हया रोशन करें ||

दूसरों से पूछना क्या हर कमी दिख जाएगी
आप अपने दिल का बस ये आइना रोशन करें ||

हैं यहाँ तनहाइयाँ और वक़्त की मजबूरियाँ
कुछ नही है हाथ मे बस फ़लसफ़ा रोशन करें ||

वक़्त जब विपरीत हो, जिंदा रखे बस धैर्य को
*इक दिया जब साथ छोड़े दूसरा रोशन करें ||*

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 12, 2017 at 8:40pm

वाह वा.. आ. सुरेन्द्रनाथ जी...
सभी अशआर उम्दा हुए. हैं 
बहुत बहुत बधाई 

Comment by नाथ सोनांचली on May 12, 2017 at 8:23pm
आभार आद0 शिखा कौशिक जी।
Comment by shikha kaushik on May 12, 2017 at 7:07pm
बहुत सुंदर. बधाई स्वीकार करें
Comment by नाथ सोनांचली on May 12, 2017 at 4:58pm
आद0 भाई डॉ आशुतोष मिश्रा जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर उपस्थिति और हौसला अफजाई के लिए आपका आभार। सादर
Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 12, 2017 at 4:00pm

हुस्न वाले भी निखर जायेंगे मोती की तरह
गर नुमाइश छोड़ कर शर्म-ओ-हया रोशन करें ||

दूसरों से पूछना क्या हर कमी दिख जाएगी
आप अपने दिल का बस ये आइना रोशन करें.................वाह भाई सुरेन्द्र जी इन दो शेरो के लिए बिशेस रूप से बधाई स्वीकार करें सादर 

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