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सीढ़ियाँ – लघुकथा -

   सीढ़ियाँ – लघुकथा -

 "सर, यह क्या सुन रही हूँ।आप तो डाइरेक्टर बनने वाले थे।मगर आप को जी एम से डिमोट कर के मैनेजर बना दिया"।

"यह सब तुम्हारी वज़ह से हुआ है लीला", वर्मा जी अपनी सैक्रेटरी पर झल्ला पड़े।

"सर, मैंने क्या किया। मैं तो सदैव वही करती रही  हूं, जो आप कहते रहे हो"।

"पर इस बार नहीं किया ना,मैंने तुम्हें शनिवार को सी एम डी के बंगले पर जाने को कहा था"।

"सर, मैंने सुना था कि नया सी एम डी बहुत खड़ूस है।मैं डर गयी थी।पर आपने मेरी जगह दूसरी लड़की भेज दी थी ना"।

"भेजी थी, पर उसने सब पोल खोल दी । उसे सी एम डी ने भगा दिया। मुझे फोन पर सी एम डी ने कहा,"मि० वर्मा, मैं वह सीढ़ी देखना चाहता था, जिसका इस्तैमाल करके आप एक मामूली सुपरवाइजर से जी एम बने। बाज़ारू लड़की तो मैं खुद भी मंगा सकता हूँ।"।

"अब क्या होगा सर"।

"अब कर्म फल भोगने के लिये तैयार रहो।जैसे सीढ़ियों का उपयोग उन्नति देता है , वैसे ही इनका दुरुपयोग पतन की ओर भी ले जा सकता है"।

मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by TEJ VEER SINGH on February 8, 2017 at 8:39pm

आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी।आप इस तरह मुझे शर्मिंदा न करें।हमारे आपके बीच जो प्यार का रिश्ता है, उसमें ये बातें कोई मायने नहीं रखती हैं कि आप मुझे किस संबोधन से बुलाते हैं।सादर।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on February 7, 2017 at 8:47pm

मुहतरम जनाब समर कबीर साहिबआदाब , कॉमेंट पोस्ट करने के बाद ध्यान गया कि कुछ
ग़लती हो गयी , फ़ौरन ही मैं ने उसे डी लिट कर दिया , कभी कभी अंजान ग़लती भी
कितनी अच्छी हो जाती है , " शेख " का मतलब मुर्शिद और पेश्वा भी होता है , मुहतरम
तेज वीर साहिब मेरे लिए बहुत आदरणीय हैं , अगर ग़लती है तो माफी चाहता हूँ -- शुक्रिया ---

Comment by TEJ VEER SINGH on February 7, 2017 at 12:55pm

हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमारी जी।आप लघुकथा के मूल भाव को समझ पाये, और उसका समुचित विश्लेषण किया ।पुनः आभार।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 6, 2017 at 8:59pm

आज कल ये सीढियां माहौल खराब कर रही हैं जिनमे योग्यता व् स्वाभिमान नही है वही इनका इस्तेमाल करता है और फिर पतन के गर्त में भी जल्दी ही गिरता  है ऐसी व्यवस्था पर कटाक्ष करती बेहतरीन लघु कथा बहुत बहुत बधाई आद० तेजवीर सिंह जी 

Comment by TEJ VEER SINGH on February 6, 2017 at 8:17pm

हार्दिक आभार आदरणीय मिथिलेश जी।आपका लघुकथा पर आना ही एक सुखद अनुभूति है।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 6, 2017 at 6:39pm

आदरणीय तेजवीर सिंह जी, क्या पंचलाइन //जैसे सीढ़ियों का उपयोग उन्नति देता है , वैसे ही इनका दुरुपयोग पतन की ओर भी ले जा सकता है"।// लघुकथा के साथ फिट बैठ गयी है? मैं इस लघुकथा से ख़ुद को जोड़ नहीं पा रहा हूँ. बहरहाल इस प्रस्तुति हेतु बधाई. सादर 

Comment by TEJ VEER SINGH on February 6, 2017 at 11:54am

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।यह प्यार सदैव ऐसे ही बना रहना चाहिये। आदाब।

Comment by Samar kabeer on February 5, 2017 at 10:15pm
जी,इसमें तो कोई शक नहीं,सभी आपसे प्यार करते हैं ।
Comment by TEJ VEER SINGH on February 5, 2017 at 10:14pm

हार्दिक आभार आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब जी। आदरणीय तस्दीक अहमद साहब,आप मुझे प्यार से कुछ भी बुलायें, मुझे अच्छा लगेगा।आपके दिल में मेरे लिये बहुत प्यार है।

Comment by TEJ VEER SINGH on February 5, 2017 at 10:11pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर क़बीर साहब जी।आदाब।आपकी शुभ कामनाओं का सदैव इंतज़ार रहता है।समर क़बीर साहब, मुझे किसी के कुछ भी संबोधन से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता बशर्ते उसमें प्यार शामिल हो। आदरणीय तस्दीक अहमद साहब मुझे प्यार से कुछ भी बुलायें, मुझे अच्छा लगेगा।उनके दिल में मेरे लिये बहुत प्यार है।

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