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तरही गजल/सतविन्द्र कुमार राणा

2122 2122 212
बह रहे हो नद-से दम भर देखिये
चलते रहना पर ठहरकर देखिए।

राज दिल के मुँह पे लाकर देखिए
आज अपनों को बताकर देखिए।

जा रहे हो दूर हमसे रूठकर
थोड़ा-सा नजदीक आकर देखिये।

नफरतों से क्या किसी को कुछ मिला?
चाह दिल में भी जगाकर देखिये।

कुछ न हासिल हो सका चलके अलग
*दो कदम तो साथ चलकर देखिए।*

मुश्किलों में भी ख़ुशी को पा लिया
मिटता उनके दिल का हर डर देखिये

मुश्किलें होती हैं सच की राह में
हौंसले से खुद को बस तर देखिए।

नेकनीयत हों अगर राणा सभी
बरकतों से भरते फिर घर देखिए।

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 30, 2016 at 3:39pm
आदरणीय मिथिलेश जी,आपको रचना प्रयास पसन्द आया।यह सार्थक हुआ।सादर हार्दिक आभार
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 30, 2016 at 3:38pm
आदरणीय महेंद्र कुमार जी,प्रोत्साहन के लिए तहेदिल शुक्रिया!यह स्नेह यूँ ही बना रहे!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 29, 2016 at 11:56pm

आदरणीय सतविन्द्र जी, इस बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने. हार्दिक बधाई स्वीकार करें. सादर.

Comment by Mahendra Kumar on December 29, 2016 at 7:54pm
आदरणीय सतविन्द्र जी, इस बढ़िया आशापूर्ण ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें। सादर।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 28, 2016 at 11:00pm
आदरणीय सुरेन्द्र भाई जी,आपका स्नेह यूँ ही बना रहे,बहुत् बहुत आभार, भाई जी!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 28, 2016 at 10:59pm
आदरणीय मिथिलेश जी सादर नमन!स्नेहिल प्रोत्साहन के लिए सादर आभार!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 28, 2016 at 10:58pm
आदरणीय श्याम नारायण जी स्नेहिल प्रोत्साहन के लिए तहेदिल आभार, सादर नमन!
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 28, 2016 at 10:57pm
आदरणीय समर कबीर जी,सादर वन्दन!आपसे अनुमोदन एवं प्रोत्साहन पाकर कृतार्थ हुआ।सादर आभार
Comment by नाथ सोनांचली on December 28, 2016 at 7:01pm
भाई सतविंदर जी सादर अभिवादन, उम्दा गजल हुयी है, कुछ अशआर तो बहुत ही अच्छे,आपको दाद के साथ बधाई निवेदित हैं।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 28, 2016 at 6:34pm

आदरणीय सतविन्द्र जी, बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने. हार्दिक बधाई. सादर 

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