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आजादी वह भाव है,जिससे सबको प्यार
इसको पाने के लिए,हुई बहुत तकरार
हुई बहुत तकरार,कई ने जान गँवाई
हुए शहीद अनेक,तभी आज़ादी पाई
सतविन्दर कविराय,रहे सुख से आबादी
है अद्भुत यह भाव,नाम जिसका आजादी

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 18, 2016 at 7:40am
सराहना के लिए हार्दिक आभार आदरणीय गोपाल सर।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 17, 2016 at 10:03pm

सराहनीय आ० सतविंदर जी

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 17, 2016 at 3:36pm
सराहना के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी।
Comment by Ashok Kumar Raktale on August 16, 2016 at 10:48pm

वाह ! बहुत सुंदर सामयिक कुण्डलिया छंद रचा है आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. सादर.

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 16, 2016 at 5:56pm
आदरणीय गिरिराज जी सादर नमन।आपको प्रयास पसन्द आया लिखना सार्थक हुआ।सादर हार्दिक आभार सँग नमन

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 16, 2016 at 4:49pm

बहुत खूब , आदरनीय सतविन्दर  भाई , सामयिक कुंडलिया के लिये आपको हार्दिक बधाई ।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 16, 2016 at 12:46pm
अनुमोदन करते हुए प्रयास की सराहना कर ऊर्जा प्रदान करने के लिए सादर हार्दिक आभार वन्दनीया कांता दीदी।सादर नमन।
Comment by kanta roy on August 16, 2016 at 11:02am

हुई बहुत तकरार,कई ने जान गँवाई
हुए शहीद अनेक,तभी आज़ादी पाई---सुन्दर ,सुमनोरम कुण्डलिया छंद गढ़ी है आपने .बधाई  आपको .

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