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सताया मुझे रात भर आपने तो

122 122 122 122

सताया मुझे रात भर आपने तो।
जगाया मुझे रात भर आपने तो।

न मिलने ही आये न सन्देश भेजा।
भुलाया मुझे रात भर आपने तो।।

नयन ये बरसते रहे रात भर कल।
रुलाया मुझे रात भर आपने तो।।

अमावस के हिस्से में बस कालिमा है।
सिखाया मुझे रात भर आपने तो।।

सुलगते रहे ख़्वाब जितने थे सारे।
जलाया मुझे रात भर आपने तो।।

मौलिक तथा अप्रकाशित

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 5, 2016 at 3:48pm
आदरणीय गिरिराज सर सादर आभार और प्रणाम

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 4, 2016 at 3:14pm

आदरणीय पंकज भाई , बहुत बढिया गज़ल कही है , दिल से बधाइयाँ आपको ।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 3, 2016 at 11:37pm
आदरणीय आशुतोष सर सादर आभार और नमन
Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 3, 2016 at 5:12pm

आदरणीय पंकज जी ..बिरह की मनोदशा का बेहतरीन चित्रण करती इस शानदार ग़ज़ल के लिए ह्रदय से बधायी स्वीकार करें सादर 

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 3, 2016 at 11:43am
आदरणीय कान्ता रॉय मैम ग़ज़ल पर शुभकामना व्यक्त करने के लिए बहुत बहित आभार
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 3, 2016 at 11:42am
आदरणीय शिज़्ज़ू शकूर सर ईद की अग्रिम बधाई और सादर धन्यवाद
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 3, 2016 at 11:42am
आदरणीय राहिला जी सादर आभार और ईद की अग्रिम बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on July 3, 2016 at 6:21am
बहुत बढ़िया आ. पंकज जी
Comment by kanta roy on July 2, 2016 at 11:16pm

बहुत  खूब  ग़ज़ल बनी  है  ये  आपकी  रात  भर की बातों  की .बधाई  स्वीकार  करें !

Comment by Rahila on July 2, 2016 at 8:24pm
बहुत खूब!शानदार ग़ज़ल आदरणीय सर जी! खूब बधाई।सादर

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