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ग़ज़ल ( आसरा ढूंढने किधर जाए )

2122 1212 22

उनकी नज़रों से जो उतर जाए |

आसरा ढूंढ़ने  किधर  जाए |

कर लिया है यक़ीन उनपे मगर

डर  है यह भी न वो मुकर जाए |

जो ज़ुबां कर न  पाए उल्फ़त में

आँख चुप चाप उसको कर जाए |

भीड़ आए नज़र क़ियामत सी

शोख़ उनकी नज़र जिधर जाए |

मिल गया जब खिताबे दीवाना

उनके कूचे से कौन घर जाए |

जिसके घर का पता नहीं कोई

कैसे उस तक कोई ख़बर जाए |

दिन में तस्दीक़ आए रात नज़र

ज़ुल्फ़ उनकी अगर बिखर जाए |

(मौलिक व अप्रकाशित )

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Comment

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 21, 2016 at 7:52pm

जनाब नरेन्द्र सिंह  साहिब , ग़ज़ल  में गहराई से शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ,महरबानी  ........ 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 21, 2016 at 7:51pm

जनाब सुरेश  कुमार साहिब , ग़ज़ल  में गहराई से शिरकत करने और हौसला अफ़ज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ,महरबानी । ऊपर वाला आपकी आरज़ू जल्द से जल्द पूरी करे और आप का शुमार अच्छे ग़ज़लकारों में हो। ........ 

Comment by narendrasinh chauhan on April 21, 2016 at 5:25pm

शानदार रचना 

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on April 21, 2016 at 10:55am
आदरणीय अहमद खान जी आपकी गजल बहुत सुन्दर व प्रशंसनीय है
बधाई हो
हम भी सीख रहे हैं आप जैसे मित्रों से लिखना धीरे धीरे

कृपया ध्यान दे...

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