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ग़ज़ल : नाम को गर बेच कर

2122   2122    2122    212

नाम को गर बेच कर व्यापार होना चाहिए
दोस्तों फिर तो हमें अखबार होना चाहिए

आपके भी नाम से अच्छी ग़ज़ल छप जायेगी
सरपरस्ती में बड़ा सालार होना चाहिए

सोचता हूँ मैं अदब का एक सफ़हा खोलकर
रोज़ ही यारो यही इतवार होना चाहिए

क्या कहेंगे शह्र के पाठक हमारे नाम पर
छोड़िये, बस सर्कुलेशन पार होना चाहिए

हम निकट के दूसरे से हर तरह से भिन्न हैं
आंकड़ो का क्या यही मेयार होना चाहिए

नो निगेटिव न्यूज का मुद्दा मुनासिब आपका
गैर वाज़िब बात का प्रतिकार होना चाइये

है कहीं खोया हुआ विज्ञापनों के ढेर में
बीच में इनके कही अखबार होना चाहिए

मौलिक एवं अप्रकाशित ।

Views: 741

Comment

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Comment by Ravi Shukla on March 17, 2016 at 3:23pm

आदरणीया कांता जी आपको गजल पंसद आई बहुत बहुत धन्‍यवाद । सादर

Comment by kanta roy on March 5, 2016 at 4:24pm

है कहीं खोया हुआ विज्ञापनों के ढेर में
बीच में इनके कही अखबार होना चाहिए ------- वाह ! क्या खूब ढूंढा है आपने अखबार को आदरणीय रवि जी। बहुत खूब ग़ज़ल हुई है आपकी। बधाई स्वीकार कीजियेगा।

Comment by Ravi Shukla on March 2, 2016 at 6:01pm

आदरणीय उमा शंकर जी आपको हमारी ग़जल पसंद आई इसके लिये आभारी है ।  एक उस्‍तादाना इस्‍लाह से इस शेर मे कोई कीजगह अच्‍छी गजल किया गया था आपने भी उसी शेर को कोट किया है । सादर धन्‍यवाद ।

Comment by Ravi Shukla on March 2, 2016 at 5:59pm

आदरणीय मनोज जी अखबार की वजह से उत्‍पन्न परेशानी से ये गजल कहने की शुरूआत हुई थी गजल तो कुइ माह पुरानी है पर इन दिनाे हमारी रेलवे की नौक्‍री इतना समय ही नहीं दे रही कि मंच पर अपने कलाम को रख कर चर्चा की जा सके इसी लिये  समय निकाल कर थोड़ी बहुत कोशिश कर रहे है जैसे मुशायरे में शिरकत की थी । आपको गजल पसंद आई धन्‍यवाद

Comment by Ravi Shukla on March 2, 2016 at 5:57pm

आदरणीय समर साहब आपसे गजल की तारीफ सुन कर लिखने का हौसला मिलता है बहुत बहुत शुक्रिया आपका

Comment by Ravi Shukla on March 2, 2016 at 5:56pm

आदरणीय गिरिराज भाई जी  गजल का अनुमोदन करने के लिये ह‍ार्दिक धन्‍यवाद

Comment by Ravi Shukla on March 2, 2016 at 5:55pm

आदरीणीय सुशील जी गजल को पसंद करने के लिये शुक्रिया

Comment by UMASHANKER MISHRA on March 1, 2016 at 11:09pm

आपके भी नाम से अच्छी ग़ज़ल छप जायेगी
सरपरस्ती में बड़ा सालार होना चाहिए ....क्या बात है बहुत बढ़िया आदरणीय रवि शुक्ला जी हार्दिक बधाई 

Comment by मनोज अहसास on March 1, 2016 at 10:15pm
बहुत खूब सर
आपके मन की
कुछ नयी उथल पुथल आपकी ग़ज़ल में दिखी है
बधाई सादर
Comment by Samar kabeer on March 1, 2016 at 8:56pm
जनाब रवि शुक्ल जी आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल से नवाज़ा आपने मंच को,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।

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