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ग़ज़ल- वक्त को मौत का इनाम आए।

2122 1212 22

तेरे हक में खुशी तमाम आए।
मेरा हिस्सा भी तेरे नाम आए।

तेरी पलके कभी न हो गीली।
और मुस्कान सुब्हो शाम आए।

बेरहम वक्त ने किया है जो।
वक्त को मौत का इनाम आए।

तुझे लवकुश कि इतनी राहत दे ।
याद तुझको कभी न राम आए।

दिल जिगर रूह राह देखे है।
कौन पहले तुम्हारे काम आए।

अपना मतलब तो सिर्फ इतना है।
तेरे लब पर मेरा कलाम आए।

मौलिक व अप्रकाशित ।

Views: 486

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Comment by Rahul Dangi Panchal on March 1, 2016 at 8:24pm
आदरणीय रवि जी शुक्रिया
Comment by Ravi Shukla on March 1, 2016 at 6:00pm

आदरणीय राहुल जी  बढि़या । बधाई हाजिर है

Comment by Rahul Dangi Panchal on March 1, 2016 at 12:40pm
शुक्रिया लक्ष्मण जी
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 1, 2016 at 11:45am

बहुत  सुन्दर

Comment by Rahul Dangi Panchal on February 29, 2016 at 1:03pm
आदरणीय Shyam Narain Verma जी आभार
Comment by Shyam Narain Verma on February 29, 2016 at 12:49pm
इस खूबसूरत  रचना की हार्दिक बधाई

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