For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तुम और कॉफी दोनों का साथ

कब होगा मेरे साथ ?

तुम्हारे घर का बगीचा

पात-पात शांत

बर्फ की ओढनी ओढ़े

मुकुलित कालिका लजाती

सोखती स्वर्ण-आभा

चोटी पर तिरती सूर्य-किरणें 

खुशबू के गुंफन ने छुआ मुझे

लगा कि तुमने उढ़ाया हो,शॉल गुनगुना सा

आवृत्तियों ने मुझे घेरा

याद आने लगे वो दिन जब तुम

बैठे रहते थे बिल्कुल सामने मेरे

और तुम्हारी मूँगे जैसी आँखों में

छल्क पड़ती थी मैं बार-बार

और तुम बिना समेटे ही मेरे हो जाते थे

तुम्हारे नाम का कॉफी-मग

आज भी रखती हूँ अपने सामने

सच कहूँ ये कॉफी भी बे-स्वाद हो गई है

न जाने शक्कर कि जगह-नीबा क्यों

पड़ जाता है इसमें,खैर छोड़ो .......

जल्दी आओ ना !

मुझे देखने हैं श्वेत बर्फीले क्वारे नजारे

तुम्हारे साथ व्याहता बन

कब आओगे सरहद से ?

अप्रकाशित व मौलिक 

कल्पना मिश्रा बाजपेई 

Views: 743

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by kalpna mishra bajpai on September 28, 2015 at 10:11pm

आभार आपका Ram Ashery जी 

Comment by kalpna mishra bajpai on September 28, 2015 at 10:11pm

आभार आपका आदरणीय गिरिराज भंडारी जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 28, 2015 at 8:38am

आदरनीया . बहुत सुन्दर भाव पूर्ण रचना , अपने होने वाले पति की बिछोह को खूब शब्द मिले हैं । बधाई आपको ।

Comment by Ram Ashery on September 26, 2015 at 9:01pm

आपने अपने मन की पीड़ा को शब्दों के माध्यम से बहुत ही सुंदर तरीके से रखा है। आपको बहुत बहुत बधाई स्वीकार हो 

Comment by kalpna mishra bajpai on September 24, 2015 at 9:15pm

आदरणीय कांता रॉय जी आपका आभार /सादर 

Comment by kanta roy on September 24, 2015 at 1:25pm
याद आने लगे वो दिन जब तुम
बैठे रहते थे बिल्कुल सामने मेरे
और तुम्हारी मूँगे जैसी आँखों में
छल्क पड़ती थी मैं बार-बार
और तुम बिना समेटे ही मेरे हो जाते थे
....... वाह !!! कब आओगे सरहद से ? इंतज़ार में कितनी शिद्दत समाई है । क्या सुंदर सुखद एहसास पिरोई है आपने अपनी इस रचना में आदरणीया कल्पना मिश्रा बाजपेयी जी । पढकर लाजवाब हो गये हम । अद्भुत ! बधाई हो
Comment by kalpna mishra bajpai on September 23, 2015 at 9:11pm

अदरणीय आपने बिल्कुल सत्य कहा ये मेरी न समझी है। सादर आभार 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 23, 2015 at 9:04pm

बहुत भावपूर्ण रचना . कुछ स्पेलिंग की गलतियाँ खटकती है  जैसे शरहद . इसे सरहद होना चाहिए .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service