For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिल आज उदास है // कान्ता राॅय

आईये पास कि दिल आज उदास है
आपकी आस में दिल आज उदास है

याद का भँवर उडा ले चला इस कदर
थाम लीजिए मुझे दिल आज उदास है


हाथ में आपकी हैं छुअन सी लगीं
घटा को देख फिर दिल आज उदास है


दिल का धडक जाना आपके नाम से
बदलियों को देख दिल आज उदास है


छतरी में सिमटना एक ठंडी शाम में
यादों में तनहा दिल आज उदास है

रूहानी तलाश रूह की जैसी प्यास
ढुंढना आस पास दिल आज उदास है

पूछना मुझसे नाम मेरे यार का
सिसकती दास्तान दिल आज उदास है

सपनों की मंडियाँ बिकते हुए सपने
देख कर तमाशा दिल आज उदास है

चाँदनी की चकमक चाँद का चमकना
खनकती चुड़ियाँ दिल आज उदास है

ख्वाहिश तुम्हें क्यों पर्दा नशी की
कर दे फना इश्क दिल आज उदास है

रिश्तों को तोलना बाजार क्या है
रौंदना इस कदर दिल आज उदास है

यादों की बूंदें गीला सा मन मेरा
नमकीन बरसात दिल आज उदास है


सूनी सी डगर गाँव के चौपाल में
चुप्पी हवाओं की दिल आज उदास है

इंतजार पल पल क्यों करें दिल मेरा
मुड़कर ना देखना दिल आज उदास है


सतरंगी सपना पलना युँ बार बार
ऐतबार क्युं कर दिल आज उदास है




कान्ता राॅय
मौलिक और अप्रकाशित

Views: 1018

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by kanta roy on August 13, 2015 at 11:01am
हा हा हा हा ... क्या खूब कही है आपने दिल विल की बातें आदरणीया प्रतिभा जी ! मजा आया आपकी प्रतिक्रिया पढकर । आभार आपको हृदयतल से ।
Comment by pratibha pande on July 16, 2015 at 11:51am

कांता  जी ,  ये   दिल विल ऐसा  ही होता है ,  कभी बेवज़ह  उदास रहता है   तो  कभी  हँसते हँसते ढेरों ज़ख्म सह लेता है    I  दो  बधाईयाँ  आपको  एक  तो  रचना  के  लिए और दूसरी  सक्रीय  सदस्य  के लिए I  

Comment by kanta roy on July 16, 2015 at 7:44am
रचना पसंदगी के लिये तहे दिल से आभार आपको आदरणीय गिरीराज भंडारी जी । पद्य के तकनीकों से अनजान होने के कारण ऐसी कमजोर रचना कर जाती हूँ । लिखने की चाह मेरी मुझे विवश कर जाती हैै कुछ भी लिखने को । नमन
Comment by Archana Tripathi on July 16, 2015 at 7:43am
माह की सक्रीय सदस्य बनने पर हार्दिक बधाई कांता जी ।
Comment by kanta roy on July 16, 2015 at 7:41am
वाह !!!! आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी आपने तो लचर -पचर कविता में जैसे प्राण फूंक दिया । बहुत कुछ समझा गये आप इसको सुधार कर । लेखन के तकनीक को मेरे ही रचना के माध्यम से मुझे बताना बहुत ही अच्छा लगा । आभार आपको तहे दिल से ।मेरी आशा बढ़ गई है अब आपसे कि आप मेरी रचनाओं पर मुझे सार्थक मार्गदर्शन देंगे ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 16, 2015 at 5:29am

आदरनीया कांता जी , विरह का खूब वर्णन किया है , आपने द्विपदीय रचना के माध्यम से  । मात्रा और शब्द संयोजन सभी पंक्तियों मे एक न होने के कारण गेयता मे कभी लग रही है । आपको रचना के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 16, 2015 at 4:47am

आदरणीया कांता जी शृंगार में बढ़िया प्रयास हुआ है. इस प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई 

यदि आप चाहे तो इसे तुकांत गीत या कविता में भी कह सकते है जो आपकी प्रस्तुति के शब्दों के हेर फेर से प्रयास किया है. यथा-

पास आ जाओ, अगर दिल हो, जो उदास कभी  
ना रही आस, हुआ दिल ना फिर उजास कभी

उड़ा के ले चला यादों का भंवर, मुझको ही

लगी घटा भी छुअन, जैसे तेरे हाथों की
थाम ले ऐसे, बंधे फिर से, वही आस कभी  

पास आ जाओ, अगर दिल हो, जो उदास कभी  


इक हसीं शाम को छतरी में सिमटना अपना
आस की प्यास में शबनम सा मचलना अपना

पूछना मुझसे मेरा नाम या कयास कभी

पास आ जाओ, अगर दिल हो, जो उदास कभी

   

 

चाँदनी चकमक करे चाँद चमक जाता है
खनकती चूड़ी से दिल रह-रह भर आता है

याद की दुनिया से मिल जाए फिर निकास कभी

पास आ जाओ, अगर दिल हो, जो उदास कभी  

Comment by babita choubey shakti on July 15, 2015 at 3:28pm
Bahut sundr bhavpurn rachna aa .kanta ji badhai
Comment by kanta roy on July 15, 2015 at 9:48am
आदरणीया शशि जी , आपकी प्रोत्साहन भरे शब्द मेरे हौसलों को बढा जाते है । जाने क्या लिख जाती हूँ ....जाने क्या कह जाती हूँ .. बन जाती है बात कोई ... पोस्ट भी कर जाती हूँ .....आभार ॥
Comment by shashi bansal goyal on July 14, 2015 at 8:07pm
आद0 कांता जी बहुत सुन्दर गेय और भावों से भरी कविता रची है । हार्दिक बधाई आपको । सादर ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
Sunday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service