For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पुलक तरंग जान्हवी

पुलक तरंग जान्हवी,
हरित ललित वसुंधरा,
गगन पवन उडा रहा है
मेघ केश भारती।

श्वेत वस्त्र सज्जितः
पवित्र शीतलम् भवः
गर्व पर्व उत्तरः
हिमगिरि मना रहा।

विराट भाल भारती
सुसज्जितम् चहुँ दिशि
हरष हरष विशालतम
सिंधु पग पखारता।

कोटि कोटि कोटिशः
नग प्रफ़्फ़ुलितम् भवः
नभ नग चन्द्र दिवाकरः
उतारते है आरती।

ओम के उद्घोष से
हो चहुँदिश शांति
हो पवित्रं मनुज मन सब।
और मिटे सब भ्रान्ति।

मौलिक एवं अप्रकाशित
आदित्य कुमार

Views: 935

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 13, 2015 at 4:18pm

आपका सदैव स्वागत है.  साथ ही, आपसे निवेदन है कि आप इसी मंच के  भारतीय छन्द विधान ग्रुप में पोस्ट हुए आलेखों को आवश्यकतानुसार देख जायें. परन्तु, सर्वप्रथम आप इअ मंच पर रेगुलर होेइये. अन्यथा आप की तारतम्यता ही नहीं बन पायेगी. इसी मंच के ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव के आयोजन में हिस्सा लें. आपको अवश्य छन्द लाभ होगा.

Comment by Aditya Kumar on July 13, 2015 at 3:36pm

आदरणीया  MAHIMA SHREE जी आप को कविता अच्छी लगी जानकर मुझे भी बहुत प्रसन्नता हुयी।  आप का हार्दिक धन्यवाद एवं आपका सदैव स्वागत है। 

Comment by Aditya Kumar on July 13, 2015 at 3:31pm

हार्दिक धन्यवाद आदरणीय भैया  Saurabh Pandey  जी।  मै इसे सीख कर ही रहूँगा जहाँ रुकावट आई फिर आप से ही पूछूंगा।  

Comment by MAHIMA SHREE on July 12, 2015 at 5:30pm

वाह ...आपको पढ़ कर मन प्रफुल्लित हो गया....इस प्रवाहमयी रचना के लिए बहुत बधाई आपको


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 4, 2015 at 10:16pm

भलेही नैसर्गिक प्रयास या प्रभावित हुए प्रयास से यह रचनाकर्म हुआ है, किन्तु श्लाघनीय है. इस हेतु बधाई, भाई आदित्यजी.

प्रमाणिका, पञ्चचामर तथा अनंगशेखर छन्दों में पदों में  लघु-गुरु की आवृति चलती है. लेकिन वहाँ लघु के बाद गुरु का क्रम होता है. आपने गुरु के बाद लघु का क्रम रखा है. यह तूणाक या चामर छन्द (७, ८) का कारण बनता है. इसमें पद गुरु वर्ण से ही समाप्त होता है.
दूसरे, आपने गुरु के स्थान पर कई बार द्विकलों का प्रयोग किया है जो कि ऐसे छन्दों के शुद्ध रूप में मान्य नहीं है. वैसे, वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो   का उदाहरण लिया जा सकता है, जहाँ, उर्दू बहर के अनुसार गुरु की जगह द्विकल (दो समवेत लघु) को लेने की छूट ली गयी है.

लेकिन मैं आपसे इतना क्यों कह रहा हूँ ? क्योंकि आपमें छन्दों के प्रति ललक दिख रही है. तभी आप ऐसे शब्द-कौतुक कर पाये हैं.

रचना के कथ्य पर विशेष कुछ नहीं कहना है.
शुभेच्छाएँ

Comment by Aditya Kumar on July 4, 2015 at 6:42pm

मै OBO का  हृदय तल से धन्यवाद करता हूँ, पहली बार मेरी एक रचना फीचर हुयी है। मेरे लिए यह उल्लास  का विषय है।  आदरणीय श्री  Er. Ganesh Jee "Bagi" जी उत्साह वर्धन के लिए आप का हार्दिक धन्यवाद।  


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 4, 2015 at 4:08pm

आदरणीय आदित्य जी, आपकी कविता अच्छी हुई है और फलस्वरूप इस मंच पर फीचर हुई, बहुत बहुत बधाई.

Comment by Aditya Kumar on June 22, 2015 at 1:04pm

आदरणीया  kanta roy जी आपको हुयी अनुभूति ही मेरे लिए उत्साह वर्धन है , साभार ....

Comment by Aditya Kumar on June 22, 2015 at 12:59pm

आभार आदरणीय   krishna mishra 'jaan'gorakhpuri जी

Comment by kanta roy on June 15, 2015 at 12:43pm
अद्वितीय अनुभूति हुई इस कविता को पढकर । वाह !!! बधाई स्वीकार करें इस कविता के लिए आदरणीय आदित्य कुमार जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
3 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183

आदरणीय साहित्य प्रेमियो, जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। संयोग शृंगार पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service