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ख़ुद ही देखी है किसी को न दिखाई मैंने

फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन/फ़इलुन

ख़ुद ही देखी है किसी को न दिखाई मैंने
तेरी तस्वीर तसव्वुर से बनाई मैंने

ख़ाक पड़ जाएगी कितने ही हसीं चहरों पर
आईने से जो कभी गर्द हटाई मैंने

मुझको पाबंदियाँ ओरों की गवारा ही नहीं
ख़ुद ही अपने लिये ज़ंजीर बनाई मैंने

अपनी ग़ज़लों से संवारूँगा ये बज़्म-ए-हस्ती
उम्र सारी इसी चक्कर में गँवाई मैंने

अर्श हिलता है ,ज़मीं काँपने लगती है,यही
आह-ए-मज़लूम की तासीर बताई मैंने

वो भी बैज़ार नज़र आने लगे अब तो "समर"
छोड़ दी जिनके लिये सारी ख़ुदाई मैंने

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on May 19, 2015 at 10:10am
जनाब हरी प्रकाश दुबे जी ,आदाब,ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
Comment by Samar kabeer on May 19, 2015 at 10:08am
जनाब मिथिलेश वामनकर जी ,आदाब,ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
Comment by Samar kabeer on May 19, 2015 at 10:07am
जनाब गिरिराज भंडारी जी ,आदाब,ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
Comment by Samar kabeer on May 19, 2015 at 10:06am
जनाब श्याम नारायण वर्माजी ,आदाब,ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
Comment by Samar kabeer on May 19, 2015 at 10:05am
जनाब मोहन सेठी 'इंतज़ार' जी ,आदाब,ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
Comment by Samar kabeer on May 19, 2015 at 10:05am
जनाब दिनेश कुमार जी ,आदाब,ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
Comment by Samar kabeer on May 19, 2015 at 10:04am
जनाब निलेश "नूर"जी ,आदाब,ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
Comment by Samar kabeer on May 19, 2015 at 10:02am
जनाब मनोज कुमार अहसास जी ,आदाब,ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
Comment by Samar kabeer on May 19, 2015 at 10:00am
जनाब सुशील सरना जी ,आदाब,ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।
Comment by वीनस केसरी on May 19, 2015 at 12:00am

खूबसूरत ग़ज़ल के हर शेर के लिए ढेरो दाद

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