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“ मैंने यह सब कुछ अपनी मजबूरी में किया है, जज साहब. मृतक मेरा सगा भाई ही था, उसने मेरा जीना हराम कर दिया था. धोखे से मेरी जमीन हड़प ली और मैं अपने पत्नी और बच्चों के साथ सड़क पर आ गया था. भूखों मरने की नौबत आ गई थी, साहब..” उसने अपने भाई की हत्या का गुनाह कुबूल करते हुए अदालत में अपना बयान दिया

“ लेकिन, पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार तुमने अपने भाई को सुबह ५ बजे ही खेत पर, गला घोंटकर मार डाला फिर तुम दोपहर में उस लाश को खीचकर कहा ले जा रहे थे..” सरकारी वकील ने कटघरे में खड़े, अपराधी से पूछा

“ साहब!! मैंने उसे सुबह मौका देखकर मार तो डाला और भाग निकला. पर मुझे बाद में बहुत दुःख हुआ. दोपहर में धूप बहुत तेज थी, सोचा जैसा भी था, मेरा भाई ही था. मैं उसे छाँव में घसीट कर ले जारहा था, तभी गाँव वालों ने मुझे...”

 

   जितेन्द्र पस्टारिया

(मौलिक व् अप्रकाशित)

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Comment by aman kumar on May 15, 2015 at 10:55am

सुंदर कथा !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on May 15, 2015 at 2:18am

मार्मिक लघुकथा 

गज़ब का प्लॉट लिया है आपने आदरणीय जितेन्द्र जी 

अपने आप में अनूठी कथानक वाली सफल और मार्मिक लघुकथा 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 14, 2015 at 11:59pm

आदरणीय विनय जी. आपकी अमूल्य प्रतिक्रिया हेतु आपका हार्दिक आभार
सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 14, 2015 at 11:58pm

आदरणीया सविता जी. आपका बहुत-बहुत आभार
सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 14, 2015 at 11:57pm

आदरणीय मनोज जी. आपका हार्दिक आभार
सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 14, 2015 at 11:56pm

आदरणीया कांता जी. आपकी उपस्थिति व् लघुकथा की सराहना के लिए आपका ह्रदय से आभारी हूँ
सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 14, 2015 at 11:54pm

आदरणीय सुधीर जी, लघुकथा की सराहना हेतु आपका ह्रदय से आभार
सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 14, 2015 at 11:53pm

आदरणीय डा.विजय जी , आपका आशीर्वाद पाकर,रचना धन्य हुई. लघुकथा पर आपकी गहन प्रतिक्रिया हेतु ह्रदय से आभारी हूँ
सादर!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 14, 2015 at 11:52pm

आदरणीय शुभ्रांशु जी. आपकी उपस्थिति लघुकथा को सार्थकता और लेखनकर्म को दोगुना मनोबल दे गई. आपका ह्रदय से आभारी हूँ
सादर!

Comment by विनय कुमार on May 14, 2015 at 11:30pm

बहुत मार्मिक , प्रभावशाली और बेहतरीन लघुकथा | मानव स्वभाव को समझना आसान कहाँ है , बधाई |

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