For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सब्जी वाला है वो

गरीब है 
पर स्वाभिमानी बहुत है 
सब्जी की ढकेल 
शहर की कोलोनियों में 
घुमाता है
जोर जोर से सब्जियों के
नाम की आबाज
लगाता है
आखिर में ले लो साहब
कहकर जरूर चिल्लाता है
कुछ आदतें हो गयी हैं
उस पर हावी
कल की सब्जियों को भी 
कह जाता है ताजी
कुछ सब्जियाँ
पूरी बिक चुकी होती हैं
उनका भी नाम पुकार जाता है
बीच बीच में पानी के छींटों से
सब्जियों को सँवार जाता है
ऊँचे लोगों की नीची हरकतों को 
बखूबी पहचानता है
लाखों कमाने वालों की 
रुपये दो रुपये की चिक चिक 
को जानता है
पाव सब्जी के बदले 
चार बातें सुना जाते हैं
ये ऊँचे लोग
पता नहीं फिर भी क्यों कहाते हैं 
ये ,ऊँचे लोग
माँ -बाबूजी ,भाई-भाभी
कोई तो नहीं रहता है इनके साथ
इसीलिये तो चार भिण्डियों से
बन जाती है बात
बडे लोगों की छोटी हरकतें 
सहन कर जाता है वो
क्योंकि रोज माँ-बाबूजी की दवाई 
लेकर घर जाता है वो
शाबाश !सब्जी वाले 
हकीकत में तो बडे लोगों से बडा है तू
लाख-गरीब होकर भी 
माँ-बाबूजी के साथ खडा है तू

उमेश कटारा
मौलिक व अप्रकाशित





Views: 1210

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 27, 2015 at 11:06am

बहुत सुंदर, सजीव सा चित्रण. बधाई आदरणीय उमेश जी

Comment by umesh katara on March 27, 2015 at 7:21am

सर मिथिलेश वामनकर जी मैंने कविता के माध्यम से एक सब्जी की फेरी वाले का चित्र खींचने का हल्का सा प्रयास किया है....

Comment by umesh katara on March 27, 2015 at 7:18am

आदरणीया Mohan Sethi 'इंतज़ार'  जी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 27, 2015 at 7:18am

आदरणीया  मिथिलेश वामनकर जी शुक्रिया मन बहुत प्रसन्न हुआ कि आपने मेरी रचनाओं को गहराई से पढ़ते हो ....मैं आपको बिल्कुल गलत नहीं कहुंगा आपके विचार आपके हैं और आलोचनात्मक रवैया रखना भी जरूरी है क्योंकि ये माहौल हमें उत्तरोत्तर सुधार करने को कहता है सादर आभार.......

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 27, 2015 at 6:49am

सुंदर और सत्य....भावपूर्ण ...बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 26, 2015 at 9:52pm

आदरणीय उमेश भाई जी अपने मर्म को अभिव्यक्त करती रचना पर बधाई... 

आप अन्यथा न ले एक बात साझा करना चाहता हूँ कि ये कविता थोड़ी इतिवृत्तात्मक हो गई है.... लग रहा है किसी कहानी/लघुकथा या उसके किसी भाग को काव्य रूप में ढाला गया है, जिसमे काव्यात्मकता कम लग रही है.  हो सकता है अतुकांत कविता की समझ न होने के कारण मुझे ऐसा भ्रम हो रहा हो. आपकी कई अच्छी रचनाएँ पढ़ चूका हूँ इसलिए इस रचना पर विचार साझा कर रहा हूँ. सादर 

Comment by umesh katara on March 26, 2015 at 9:37pm

आदरणीयासुनील प्रसाद(शाहाबादी) जी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 26, 2015 at 9:37pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 26, 2015 at 9:36pm

आदरणीय Shyam Mathpal जी शुक्रिया

Comment by umesh katara on March 26, 2015 at 9:35pm

आदरणीय Meena Pathak जी शुक्रिया

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Friday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service