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मन के कमरे में कैद हमारे भाव विचार

बने वाणी के मोती ,कलम की बहती धार

सुवासित हो फ़िज़ा ,पढ़े सुने संसार

बुने सतरंगी सपने,बरसे प्यार की फुहार

डूबे खुश्बुओं में ,सुगन्धित हो बहार

खुशिओं के फूटे झरने ,भीगें बार -बार

मिले जीने की उमंग,सपना हो साकार

भूल सारे गम ,नव अंकुर का आधार

चाहतों की संतुष्टि ,आशीष से सरोबार

खुले परिचय के द्वार ,जुड़ा नया परिवार

धन्य हो गए हम ,दिलों के जुड़े तार

भूल जोड़ बाकी का गणित ,मिला जीने का सार

मिल गया सब कुछ ,अब कैसा व्यापार

बन गया मन खुला आँगन ,बरसे सावन की बौछार

हो गया पवित्र पावन, अंकुरित हो रहे नव विचार .

 

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Shyam Mathpal on March 21, 2015 at 7:18pm

Priya Maharshi Tripathi Ji,

Bahut dhanyabad.

Comment by maharshi tripathi on March 20, 2015 at 7:44pm

सुन्दर ,प्रस्तुति ,,हार्दिक बधाई आ.  Shyam Mathpal  जी |

Comment by Shyam Mathpal on March 19, 2015 at 7:04pm

आदरणीय कृष्णा मिश्रा जी,

आपको रचना अच्छी लगी. धन्यवाद.

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 18, 2015 at 10:11pm

भूल जोड़ बाकी का गणित ,मिला जीने का सार

मिल गया सब कुछ ,अब कैसा व्यापार

बन गया मन खुला आँगन ,बरसे सावन की बौछार

हो गया पवित्र पावन, अंकुरित हो रहे नव विचार .

ये पंक्तियाँ बहुत सुन्दर लगीं! बहुत बहुत बधाईयां आदरणीय shyam mathpal जी!

Comment by Shyam Mathpal on March 18, 2015 at 9:00pm

आ.हरी प्रकाश दुबे जी , आपका स्नेह हमेशा मिलता है.  हृदय से आभार.

Comment by Hari Prakash Dubey on March 18, 2015 at 8:30pm

आदरणीय श्याम मठपाल जी, सुन्दर भाव , सुन्दर  रचना , बधाई आपको ! सादर 

Comment by Shyam Mathpal on March 18, 2015 at 8:21pm

आ.डॉ.विजय शंकर जी,आ.नवीन मणि त्रिपाठी जी ,आ.श्याम नारायण वर्मा जी ,आ.सोमेश कुमार जी व डॉ.गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी.

आप सब की दुआ व कृपा है. आपको रचना पसंद आई तहे दिल से आभार.

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 18, 2015 at 7:44pm
बहुत ही सुन्दर , बधाई, आदरणीय श्याम मठपाल जी, सादर।
Comment by somesh kumar on March 18, 2015 at 7:05pm

सुंदर भावपूर्ण रचना 

Comment by Shyam Narain Verma on March 18, 2015 at 2:38pm
सुन्दर भाव पूर्ण रचना के लिये आपको बधाइयाँ ।

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