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गीत 'लो बरखा फिर आई'

गीत
-लो बरखा फिर आई-

बादल की झोली में भरकर
बिखराती जल लाई।
सुप्त प्राण में प्राण सींचने
लो बरखा फिर आई।

सूखे विटप तृप्त तन्मय अब
करते झुक अभिनन्दन।
झूम झूम उत्साहित हों ज्यों
गीत गा रहे वन्दन।
उष्ण अनल से तपे ग्रीष्म की
अब तो हुई बिदाई।...सुप्त प्राण....

तप्त दिवाकर ने झुलसाया
वन उपवन सब सूखे।
दरक रहा धरती का सीना
बिन तृण के सब भूखे।
मदमाते रिमझिम सावन ने
जग की पीर मिटाई।...सुप्त प्राण

छन छन बूँदें तप्त धरा पर
गिर गिर जब इठलाती।
पुलकित धरती हो विभोर तब
रूप सजा इतराती।
सौंधी सी खुशबू मिट्टी की
साँसों बीच समाई।
सुप्त प्राण में प्राण सींचने
लो बरखा फिर आई।....सीमा हरि शर्मा 18.09.2014
(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 557

Comment

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Comment by harivallabh sharma on September 21, 2014 at 2:11pm

सुन्दर गीत..बरसात का सुस्वागत करता और ग्रीष्म से त्राण देता ..
सूखे विटप तृप्त तन्मय अब
करते झुक अभिनन्दन।
झूम झूम उत्साहित हों ज्यों
गीत गा रहे वन्दन।
उष्ण अनल से तपे ग्रीष्म की
अब तो हुई बिदाई।...सुप्त प्राण....बधाई 

Comment by seemahari sharma on September 20, 2014 at 10:39pm
आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी बहुत बहुत आभार आपका आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया से उत्साहवर्धन हुआ है आपने 'तृण'लिखने का कहा है मैं एडिट कर दूंगी इसी तरह मार्गदर्शन करतें रहें सादर
Comment by seemahari sharma on September 20, 2014 at 10:32pm
भाई जितेन्द्र 'गीत'जी बहुत बहुत धन्यवाद आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिये।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 20, 2014 at 1:50pm

महनीया

बहुत सुन्दर i  त्रण को तृण करले बस i ह्रदय में ऋतु मानो साक्षात् उतर आया i

 

छन छन बूँदें तप्त धरा पर
गिर गिर जब इठलाती।
पुलकित धरती हो विभोर तब
रूप सजा इतराती।
सौंधी सी खुशबू मिट्टी की
साँसों बीच समाई।
सुप्त प्राण में प्राण सींचने
लो बरखा फिर आई।....

 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on September 20, 2014 at 8:45am

छन छन बूँदें तप्त धरा पर
गिर गिर जब इठलाती।
पुलकित धरती हो विभोर तब
रूप सजा इतराती।
सौंधी सी खुशबू मिट्टी की
साँसों बीच समाई।
सुप्त प्राण में प्राण सींचने
लो बरखा फिर आई।...........बहुत सुंदर, सजीव सा वर्णन. बधाई आदरणीया सीमा जी

Comment by seemahari sharma on September 18, 2014 at 7:40pm
ह्रदय से शुक्रिया Meena Pathak जी
Comment by Meena Pathak on September 18, 2014 at 7:04pm

बहुत सुन्दर 

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