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दोहे // प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा //

दोहे // प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा //

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ये मात्र दोहे हैं. चिकित्सा सलाह नहीं .

------------------------------------------

मानस चरचा हो रही सुनो लगा कर ध्यान

भव सागर तरिहो सभी इसको पक्का जान

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मटर पराठा खा गये  बैठे जितने लोग

लौकी सेवन नित करें भागें सगरे रोग

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लौकी रस इक्कीस  दिन प्रातः पी लें लोग

रोग दोष  फटके नही जीवन सुख सब भोग

-------------------------------------------

रोज करेला तोड़ कर  उबाल रस पी जाय

जिगर गुर्दा रखे  सही  मुख  पर कान्ति लाय

----------------------------------------- 

पानी दूषित हो चला करता मानव खेल

उबला पानी नित पियो जिगर न होगा फेल

---------------------------------------------

मौलिक /अप्रकाशित

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा

२७-७-२०१४

Views: 781

Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on August 3, 2014 at 3:15pm

आदरणीय श्री सौरभ पांडे जी 

सादर / सस्नेह 

ये सब आप सब के प्रयास का फल है. 

मार्ग दिखाते  रहिये 

आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 3, 2014 at 2:27pm

आदरणीय प्रदीपजी, आप छन्दों के प्रति गंभीर प्रयास कर रहे हैं यही इस मंच के लिए सुखद समाचार है.

आपका यह प्रयास विन्दुवत, सतत, दीर्घकालिक हो  ..

शुभकामनाएँ

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on August 1, 2014 at 7:17pm

आदरणीया  सविता मिश्र जी 

सादर अभिवादन 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

स्नेह बनाये रखिये 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on August 1, 2014 at 7:16pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी 

सादर 

आपका ये स्नेह मुझे सदैव प्रोत्साहित करता है .

आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on August 1, 2014 at 7:14pm

परम सनेही जितेन्द्र जी 

सादर 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

खुश रहिये 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on August 1, 2014 at 7:13pm

आदरणीय डा. विजय शंकर  जी 

सादर 

आपके मार्गदर्शन कि सदेव प्रतीक्षा रहेगी 

स्नेह हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on August 1, 2014 at 7:12pm

आदरणीय डा. आशुतोष मिश्र   जी 

सादर 

 मैने अभी इस दिशा में कार्य प्राम्भ किया है. आपके मार्गदर्शन कि सदेव प्रतीक्षा रहेगी 

स्नेह हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on August 1, 2014 at 7:11pm

आदरणीय डा. गोपाल नारायण श्रीवास्तव  जी 

सादर 

सच ही है , मैने अभी इस दिशा में कार्य प्राम्भ किया है. आपके मार्गदर्शन कि सदेव प्रतीक्षा रहेगी 

स्नेह हेतु आभार 

Comment by savitamishra on July 30, 2014 at 11:51pm

बहुत सुंदर आदरणीय ..सादर नमस्ते


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 30, 2014 at 9:58pm

सभी दोहे शिक्षाप्रद हैं और शिल्प पर भी सधे हैं बस करेले वाला थोडा और समय मांग रहा है ,आपको इन सुन्दर सार्थक दोहों के लिए हार्दिक बधाई |

कृपया ध्यान दे...

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