For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आई बरखा झूमती

कलियों का मुख चूमती

पवन झकोरे सर-सर करते

डाली –डाली झूमती

 

आँगन की महके है माटी

गमले में तुलसी लहराती

बैठ झरोके टुक –टुक देखूँ

भीगी मोरें नाचती

 

अंबर पर मेघों का पहरा

श्याम रंग फैला है गहरा

मेघों की धड़के है छाती

पपीहा टेर सुहाती

 

महक उठी कृषकों की पौरें

धीमी हो गई रहट की दौड़ें

गीली हो गई दिन और रातें

नई उमंगें झाँकती

मौलिक व अप्रकाशित

कल्पना मिश्रा बाजपेई 

Views: 558

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by kalpna mishra bajpai on July 22, 2014 at 12:04am

आदरणीय पाण्डेय सर।, आप का सुझाव सिर आँखों पर । आप ने रचना को समय दिया बहुत आभारी हूँ मैं /सादर

टुक टुक लिखने में गलती हो गई है ध्यान रखूंगी . 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 21, 2014 at 11:03pm

आपकी प्रस्तुति के लिए सादर बधाइयाँ.

अभ्यासरत रहें आदरणीया. इससे कई तथ्य स्पष्ट होंगे.

एक बात और,  टूक-टूक  को टुक-टुक लिखते हैं. अवश्य ही यह ट्ंकण त्रुटि ही है. 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on July 19, 2014 at 8:27pm

सुन्दर रचना !

Comment by mrs manjari pandey on July 17, 2014 at 7:59pm
बरखा रानी जी अपना नाम सार्थक किया। भावपूर्ण प्रस्तुति
Comment by kalpna mishra bajpai on July 17, 2014 at 7:17pm

आ0 माहेश्वरी जी बहुत शुक्रिया /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on July 17, 2014 at 7:16pm

आ0 जितेंद्र जी बहुत शुक्रिया /सादर 

Comment by kalpna mishra bajpai on July 17, 2014 at 7:16pm

आदरणीय धामी जी बहुत शुक्रिया /सादर 

Comment by Maheshwari Kaneri on July 16, 2014 at 6:37pm

बर्षा ऋतु का सुन्दर चित्रण किया है इसके लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें ।आदरणीया कल्पना जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 16, 2014 at 11:37am

आ0 कल्पना जी गीत के माध्सम से बर्षा ऋतु का सुन्दर चित्रण किया है इसके लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें ।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 15, 2014 at 1:00am

बरखा ऋतू के आगमन पर बहुत सुंदर भाव पिरोये, बधाई आदरणीया कल्पना जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service