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मन मेरे तू क्या होता?
जो मुझको तू भा जाता
कर लेता मुझको दीवाना
तो मैं तुझको अपनाता

मन मेरे तुलसी दल होता
मोहन के मस्तक पर सोहता
पा जाता जीवन निर्वाण
तो मैं तुझको अपनाता

मन मेरे जमुना जल होता
कृष्णा के तन को छू जाता
पा जाता तू सम्मान
तो मैं तुझको अपनाता

मन मेरे तू हरिपथ होता
प्यारे के चरणों को छूता
पा जाता सुजीवन सोपान
तो मैं तुझको अपनाता

मन मेरे तू दर्पण होता
कृष्णा के छवि को दर्शाता
कहलाता तू बड़ा महान
तो मैं तुझको अपनाता

मन मेरे तू वाणी होता
निश दिन हरी गुंजन तू करता
बस जाता तू सब के प्राण
तो मैं तुझको अपनाता

मन मेरे तू आत्मा होता
हर पल तू उस में ही रहता
करता रहता हरी गुणगान
तो मैं तुझको अपनाता

कल्पना मिश्रा बाजपेई
मौलिक व अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 2, 2014 at 9:17am

आप इस मंच पर रचनाएँ अवश्य प्रस्तुत करें. किन्तु अच्छे रचनाकर्म के लिए अन्य रचनाओं के पाठ के साथ-सथ स्वाध्याय बहुत आवश्यक है. अन्य रचाकारों की रचनाओं पर टिप्पणी अवश्य करें ताकि पता चले कि किसी रचना को पढ कर उसमें से आपने क्या आत्मसात किया.

यदि मेरा अतिरेक में कह दिया जाना लगा हो तो क्षमा-प्रार्थी हूँ.

सादर

Comment by बृजेश नीरज on May 27, 2014 at 7:32pm

अच्छी रचना है! इस सद्प्रयास के लिए आपको हार्दिक बधाई! 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on May 26, 2014 at 2:59pm

मन मेरे तू वाणी होता 
निश दिन हरी गुंजन तू करता 
बस जाता तू सब के प्राण 
तो मैं तुझको अपनाता

सुन्दर भाव ...अच्छी रचना ....काश मन ये सब करे ऐसा हो तो आनंद और आये
भ्रमर ५


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 26, 2014 at 12:49pm

आदरणीया कल्पना जी , सुन्दर भाव पूर्ण रचना के लिये आपको बधाइयाँ ।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 23, 2014 at 10:54pm

बहुत सुंदर भावपूर्ण रचना, बधाई स्वीकारें आदरणीया कल्पना जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on May 23, 2014 at 8:55am

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति है

Comment by Meena Pathak on May 22, 2014 at 11:32pm

बहुत  सुन्दर ...बधाई 

Comment by कल्पना रामानी on May 22, 2014 at 7:55pm

शांत, शीतल  और कोमल भावों में बँधी सुंदर रचना के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिये प्रिय कल्पना जी

Comment by kalpna mishra bajpai on May 22, 2014 at 1:41pm

आ० श्याम नारायन सर हार्दिक आभार /सादर

Comment by kalpna mishra bajpai on May 22, 2014 at 1:41pm

आ० गोपाल सर हार्दिक आभार /सादर

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