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मैं मूक बन जाती हूँ …।

मैं मूक बन जाती हूँ …।

नहीं, अब मैं इस गहन तम में नभ को न निहारूंगी
अपनी अभिलाषाओं को तम के गहन गर्भ में दबा दूंगी
दर्द की नमी को पलकों में ही दफना दूंगी
अपने गिले -शिकवों का बवंडर अपने दिल के किसी कोने में छुपा लूंगी

कितना विशवास था
तुम तो मेरे हृदय की टीस को पहचानोगे
यौवन की दहलीज़ पर पाँव रखते ही
हर निशा मैं तुम्हें निहारती थी
शशांक मेरे पागलपन पर मुस्कुराता था
पवन मुझे समझाती थी
मगर मैं स्वयं में खोई थी
सलौने सपनों में सोई थी
न जाने किसके लिए दिल धड़कता था
मेरा ख्वाब सवेरा होने से डरता था
हर बार सोचती थी मेरी मुराद पूरी होगी
लोग कहते हैं तो सही कहते होंगे
यही सोच सोच मैं
सुबह से शाम तक रात की प्रतीक्षा करती थी

रात आते ही बहुत प्रसन्न होती थी
गहन अन्धकार में नभ को एकटक निहारती थी
तारे के टूटते ही
हाथ जोड़ कर
अपने हृदय के आँगन में बसी छवि की गुहार करती
तारे टूटते रहे
हर तारे के साथ मेरे ख्वाब भी टूटते रहे

बेमन से मैं आज भी रात निहारती हूँ
मगर किसी तारे के टूटने पर
कुछ भी नहीं मांगती
अतृप्ति के गंभीर परिणाम से घबराती हूँ
इसीलिए मैं मूक बन जाती हूँ


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Meena Pathak on June 3, 2014 at 10:04pm

बहुत ही सुन्दर रचना ... सादर बधाई आप को 

Comment by coontee mukerji on June 3, 2014 at 9:30pm

हाथ जोड़ कर
अपने हृदय के आँगन में बसी छवि की गुहार करती
तारे टूटते रहे
हर तारे के साथ मेरे ख्वाब भी टूटते रहे

बेमन से मैं आज भी रात निहारती हूँ
मगर किसी तारे के टूटने पर
कुछ भी नहीं मांगती
अतृप्ति के गंभीर परिणाम से घबराती हूँ
इसीलिए मैं मूक बन जाती हूँ......कितनी सच्चाइयाँ छिपी हुई है इन पक्तियाँ में......आपको साधुवाद...सादर

Comment by Sushil Sarna on June 3, 2014 at 2:49pm

आदरणीय जितेन्द्र गीत   जी रचना पर आपकी मधुर  प्रशंसा का हार्दिक आभार 

Comment by Sushil Sarna on June 3, 2014 at 2:48pm

आदरणीया अन्नपूर्णा बाजपई  जी रचना पर आपकी मधुर  प्रशंसा का हार्दिक आभार 

Comment by Sushil Sarna on June 3, 2014 at 2:47pm

आदरणीय शिज्जु शकूर जी रचना पर आपकी स्नेहिल प्रशंसा का हार्दिक आभार 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 3, 2014 at 1:37pm

बहुत सुंदर, प्रभावशाली रचना. बधाई आदरणीय शुशील जी

Comment by annapurna bajpai on June 3, 2014 at 11:03am

सुंदर रचना , बधाई आपको आ0 सुशील सर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 2, 2014 at 4:19pm

आदरणीय सुशील सर अच्छी भावाभिव्यक्ति है बहुत बहुत बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

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