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दिल के वो बरक़रार हिस्सों में

जिसने तोड़ा हज़ार हिस्सों में

दिल के वो बरक़रार हिस्सों में

 

रोए, मुस्काए, चीखे, झुंझलाए

दिल का निकला ग़ुबार हिस्सों में

 

सबसे बदतर रहा  यह बटवारा

एक परवरदिगार हिस्सों में

 

रूह, कल्बो जिगर व साँसों के

वो अकेला शुमार हिस्सों में

 

हमको तसलीम है करो तकसीम

हाँ मगर शानदार हिस्सों में

 

आप शामिल रहे कहीं ना कहीं

ज़ीस्त के यादगार हिस्सों में

 

मौत साँसों की किश्ते आखिर थी

चुक गया सब उधार हिस्सों में

Asif Amaan

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 1280

Comment

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Comment by Asif Amaan on May 28, 2014 at 3:04pm

Mohtaram Yograj Barbhakar Sb yakeen janiye aapka comment padhkar jo hausla paida hua wo maiN bayaan nahi kar sakta.. aapki muhabbat aur daad ka behad shukriya!!


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 27, 2014 at 4:03pm

//जिसने तोड़ा हज़ार हिस्सो में
दिल के वो बरक़रार हिस्सो में// क्या कहने हैं, कितनी सादगी है मतले में - वाह !!!!  

//रोए, मुस्काए, चीखे, झुंझलाए
दिल का निकला ग़ुबार हिस्सो में// क्या तेवर हैं - बहुत खूब !!

//सबसे बदतर मिसाल बंटने की
एक परवरदिगार हिस्सो में// लाजवाब शेअर - जीते रहिए।

//रूह, कल्बो जिगर में, साँसों में
वो अकेला शुमार हिस्सो में// यह तेवर भी कमाल का है.

/हमको तसलीम है करो तकसीम
हाँ मगर शानदार हिस्सो में// अय हय हय हय हय हय !!! कितनी मासूमियत से तक़सीम को तस्लीम किया है - बहुत आला. हासिल-ए-ग़ज़ल शेअर।       

//वो कहीं ना कहीं रहा शामिल
ज़ीस्त के यादगार हिस्सो में// बहुत खूब.  

//मौत साँसों की किश्ते आखिर थी
चुक गया सब उधार हिस्सो में// वाह वाह वाह - ये ख्याल दिल को छू गया.

हरेक शेअर पुरनूर और पुरकशिश हुआ हुआ है.  इस मुरस्सा कलाम पर ढेरों ढेर दाद हाज़िर है, स्वीकार करें भाई आसिफ जी. 

Comment by Asif Amaan on May 27, 2014 at 3:15pm

Gumnam Pitorghari Sb aapko lafz par bhi padha hai, thanx for your appreciation!!

Comment by Asif Amaan on May 27, 2014 at 3:14pm

Mohtaram Giriraj Bhandari Sb aapka behad shukriya!!

Comment by Asif Amaan on May 27, 2014 at 2:18pm

Dr Ashutosh Mishra Sb dil ki gehraiyoN se Shukriya!!

Comment by Dr Ashutosh Mishra on May 27, 2014 at 1:57pm

रोए, मुस्काए, चीखे, झुंझलाए

दिल का निकला ग़ुबार हिस्सो में..क्या बात है 

रूह, कल्बो जिगर में, साँसों में

वो अकेला शुमार हिस्सो में...इश्वर की सार्वभौमिकता वाकई लाजबाब 

भाई आशिफ जी ..आपसे पहली बार रूबरू होने का मौका मिला ..और ये पहली मुलाकात यादगार मुलाकात हो गयी ..मेरी तरफ से हादिक बधाई 

 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on May 17, 2014 at 5:04pm

आदरणीय आसिफ भाई , खूब सूरत गज़ल के लिये दाद हाज़िर है !!

Comment by gumnaam pithoragarhi on May 16, 2014 at 5:43pm

क्या बात है.हार्दिक बधाई

 

Comment by अरुन 'अनन्त' on May 16, 2014 at 2:43pm

आसिफ भाई मुआफ कीजिये गलती से २१२ कह गया वो शेअर दुरुस्त है,

रूह, कल्बो जिगर में, साँसों में... क्या कुछ इस तरह से नहीं हो सकता.... रूह कल्बो जिगर व साँसों के,

वो अकेला शुमार हिस्सो में

Comment by Asif Amaan on May 16, 2014 at 1:01pm

Bhai Arun Sharma sb zarra nawazi ka  behad shukriya!!

aapke comments appriciable haiN isse lagta hai ki aap kehne se ziyada sunne aur padhne maiN bhi yakeen rakhte haiN leking aapke points ke liye maiN bhi kuch kehna chahoonga..

1. yeh typing ki mistake hai na ki aib jo ek nae hindi typing seekhne wale se hona lazmi hai.. :-)

2. bilkul takabul e radeef ka eib hai, jo raiz hai.. mujhe iska ilm bhi hai leking mujhse iske bagair yeh sher nahi ho pa raha tha.. bade bade shora ke yahaaN ye dekhne ko milta hai.. e.g " suna hai bole  to baton se phool jhadte haiN, yeh baat hai to chalo baat karke dekhte haiN" (Ahmad Faraaz)

3. ghazal ki taktee 2122 1212 22 hai bilkul sahi hai aur is misre maiN aakhri lafz takseem 221 ke vazn par hai na ki 212 jo zihaaf hai aur raiz hai..

phir bhi agar mere liye kuch seekhne layak ho to zaroor bataeiN..

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