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चुनावी चौसर ! (चौपई छंद)

छिड़ी हुई शब्दों की जंग | दिखा रहे नेता जी रंग ||

वैचारिकता नंगधडंग | सुनकर हैरत जन-जन दंग ||

जाति धर्म के पुते सियार | इनपर कहना है बेकार ||

बात-बात पर दिल पर वार | जन मानस पर अत्याचार ||

 

पांच वर्ष में एक चुनाव | छोड़े मन पर कई प्रभाव ||

महँगाई भी देती घाव | डुबो रही है सबकी नाव ||

नारी दोहन अत्याचार | मिला नहीं अबतक उपचार ||

सरकारें करती उपकार | निर्धन फिरभी हैं बीमार ||

 

तीर तराजू औ तलवार | किसे कहें अब जिम्मेदार ||

चढ़ा देश को अजब बुखार | हर-हर घर-घर इक सरकार ||

फूल पत्तियाँ तीर-कमान |चौसर पर हैं कई निशान ||

मतदाता सारे हैरान | किसे करें अपना मतदान ||

 

 

मौलिक/अप्रकाशित.

 

-अशोक कुमार रक्ताले.

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 2, 2014 at 2:45am

वाह वाह वाह !

बधाई बधाई बधाई !! ... 

आखिरी कुछ छन्दों पर तो विशेष रूप से वाह वाह !

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 1, 2014 at 2:59pm

आदरणीय अशोक भाई

खूब व्यंग्य कसा है आपने चौपई में, नेताओं की खटिया खड़ी कर दी 

आपकी और सौरभ भाई की चौपई से मुझे भी कुछ सीखने को मिला । 

एक स्वर में पढ़ने में मज़ा आया

हार्दिक बधाई , 

Comment by vijay nikore on April 28, 2014 at 11:39am

इस अच्छी रचना के लिए बधाई।

Comment by Sarita Bhatia on April 28, 2014 at 9:07am

एक दम सामयिक रचना ,बधाई आदरणीय 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 28, 2014 at 8:26am

बहुत सुन्दर, सार्थक और सामयिक चोपई छंद पढ़ कर आनंद आ गया |आपको हार्दिक बधाई श्री अशोक कुमार रक्ताले जी |

मतदाता सारे हैरान | किसे करें अपना मतदान ||

है हमें कर्तव्य का भान,गुत्थी सुलझाओ भगवान् | 

Comment by Satyanarayan Singh on April 26, 2014 at 9:25pm

आ.रक्ताले जी चुनावी चौसर पर आधारित अति सुन्दर प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 25, 2014 at 5:57pm

आदरणीय अशोक रक्ताले भाई जी , बहुत सुन्दर सामयिक चौपाई छंद रहना की है आपने , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

Comment by coontee mukerji on April 25, 2014 at 4:18pm

बहुत सुंदर रचना...आजकल के चुनावी महौल का सुंदर चित्र....हार्दिक बधाई.

Comment by अजीत शर्मा 'आकाश' on April 25, 2014 at 6:41am

चौपई छन्द में अच्छी चुनावी चौसर ----- यथार्थ परक प्रस्तुति हेतु बधाई भाई रक्ताले जी !!!

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 24, 2014 at 3:40pm

आदरणीय प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा साहब सादर प्रणाम, रचना भाव पर मिली आपकी प्रतिक्रया से रचना कर्म सार्थक हुआ सादर आभार.

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