For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

नया साल है चलकर आया देखो नंगे पांव

आने वाले कल में आगे देखेगा क्या गाँव

 

धधक रही भठ्ठी में

महुवा महक रहा है

धनिया की हंसुली पर

सुनरा लहक रहा है  

कारतूस की गंध

अभी तक नथुनों में है

रोजगार गारंटी अब तक

सपनों में है

हो लखीमपुर खीरी, बस्ती

या, फिर हो डुमरांव

कब तक पानी पर तैरायें

काग़ज़ वाली नांव !

 

माहू से सरसों, गेहूं को

चलो बचाएं जी

नील गाय अरहर की बाली

क्यों चर जाएं जी

ठंडी रात में बूढ़ा-माई

बडबड नहीं करें

हम अपने हिस्से का सूरज

खुद ही चलो गढ़ें

धूप कड़ी हो तो दे जाएं

थोड़ी थोड़ी छाँव

ठंडी ठंडी पुरवाई से

बेहतर है पछियांव.. .

****

मौलिक एवं अप्राकाशित 

Views: 734

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by कल्पना रामानी on December 30, 2013 at 6:34pm

हम अपने हिस्से का सूरज

खुद ही चलो गढ़ें

धूप कड़ी हो तो दे जाएं

थोड़ी थोड़ी छाँव

ठंडी ठंडी पुरवाई से

बेहतर है पछियांव..

नव वर्ष पर बहुत बढ़िया नवगीत...

Comment by अजीत शर्मा 'आकाश' on December 30, 2013 at 2:59pm

नव वर्ष पर बहुत ही शानदार गीत .... क्या कहने !!!

Comment by CHANDRA SHEKHAR PANDEY on December 30, 2013 at 1:43pm

ateev sundar mananiy, Jay ho.

Comment by S. C. Brahmachari on December 29, 2013 at 9:19pm
नया साल है चलकर आया देखो नंगे पाँव
कबतक पानी पर तैराएं कागज़ वाली नाव ? ........... ???????? क्या कहूँ ? उत्तम भावाभिव्यक्ति !
Comment by coontee mukerji on December 29, 2013 at 6:38pm

बहुत सुंदर रचन....कवि की सुंदर कल्पना भी लेखनी की यथार्थ भी, आशा भी आश्वासन भी.....

हम अपने हिस्से का सूरज

खुद ही चलो गढ़ें

धूप कड़ी हो तो दे जाएं

थोड़ी थोड़ी छाँव

ठंडी ठंडी पुरवाई से

बेहतर है पछियांव......बहुत खूब जितनी  तारीफ करें कम लगता है.सादर

कुंती

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 29, 2013 at 12:38pm

आपका यह सुंदर गीत मन को छू गया आदरनीय राणा साहब, आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें

Comment by ajay sharma on December 28, 2013 at 10:51pm

हो लखीमपुर खीरी, बस्ती या

फिर हो डुमरांव

कब तक पानी पर तैरायें

काग़ज़ वाली नांव    .,........sumpurna geet bejod hai par ye band ....jisme mere district  ka nam aaya hai ....ativishesh ho gaya hai .........dhanyavad ..................hardik dhanyabad 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on December 28, 2013 at 10:41pm

गाँव का सुंदर दृश्य परिलक्षित है इस गीत में बधाई राणाप्रताप भाई। और नव वर्ष की शुभकामना ।

Comment by Shyam Narain Verma on December 28, 2013 at 5:40pm
सुन्दर गीत के लिए आपको बधाई i
Comment by vandana on December 28, 2013 at 3:09pm

बहुत सुन्दर भावों से सजी रचना बहुत 2 बधाई आदरणीय 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

pratibha pande replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी  बहुत सुन्दर छंद सृजन, चित्र के हर एक भाव को समेटे हुए।हार्दिक बधाई आपको"
18 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह.. कृषक के कष्ट और योगदान को कहते बहुत सुन्दर छंद सृजन। हार्दिक बधाई आदरणीय भाई लक्ष्मण…"
21 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन आदरणीय"
26 minutes ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल- मसीहा बन के जो आसानियाँ बनाते हैं

वज़्न -1212 1122 1212 22/112मसीहा बन के जो आसानियाँ बनाते हैं लगा के आग वही बस्तियाँ बनाते हैंये…See More
45 minutes ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"122 122 122 12 हमारे लिए खेत ही स्वर्ग हैयहीं प्राण मन बंधु उत्सर्ग है इसी पेड़ की छाँव में मन…"
2 hours ago
Anil Kumar Singh joined Admin's group
Thumbnail

चित्र से काव्य तक

"ओ बी ओ चित्र से काव्य तक छंदोंत्सव" में भाग लेने हेतु सदस्य इस समूह को ज्वाइन कर ले |See More
2 hours ago
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"नमन है किसानों सदा आपको।तुम्हारे भले काम के जाप को।।सदा खेत खलिहान में रात हो।न परिवार से चैन से…"
5 hours ago
Deepanjali Dubey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम बहुत सुंदर चित्र व शक्ति छंद की जानकारी के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
5 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"कृपया ढेलते को ठेलते पढ़ें"
9 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"मगन है स्वयं में अकेला पड़ा रखे फोन पर हैं नयन दो गड़ा खड़ी है फसल खेत सुनसान है नहीं टोक कोई न…"
10 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह ! आदरणीय भाई छोटेलालजी अच्छे छंद रचे| हार्दिक बधाई  उटज कीचक शजर का सुन्दर प्रयोग| स्नेह…"
13 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक-126 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी वाह  !  अथक प्रयास किया आपने |  छै पद लिख डाले | इस  लम्बी…"
13 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service