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मौत के साथ आशिकी होगी (अरुन 'अनन्त')

बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून
2122 1212 22

मौत के साथ आशिकी होगी,
अब मुकम्मल ये जिंदगी होगी,

उम्र का ये पड़ाव अंतिम है,
सांस कोई भी आखिरी होगी,

आज छोड़ेगा दर्द भी दामन,
आज हासिल मुझे ख़ुशी होगी,

नीर नैनों में मत खुदा देना,
सब्र होगा अगर हँसी होगी,

आखिरी वक्त है अमावस का,
कल से हर रात चाँदनी होगी.

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by अरुन 'अनन्त' on December 26, 2013 at 10:42am

बहुत बहुत शुक्रिया भाई लक्ष्मण धामी जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 26, 2013 at 10:41am

तहे दिल से शुक्रिया आदरणीय शिज्जु भाई जी ग़ज़ल आपको पसंद आई मेरे लिए संतोष की बात है स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 26, 2013 at 10:41am

हार्दिक आभार आदरणीया महिमा श्री जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 26, 2013 at 10:40am

हार्दिक आभार आदरणीया कुंती मुखर्जी जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 26, 2013 at 10:40am

बहुत बहुत शुक्रिया अनुराग भाई जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 26, 2013 at 10:40am

हार्दिक आभार आदरणीय गिरिराज सर ग़ज़ल आपको पसंद आई सार्थक हुई स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 26, 2013 at 9:31am

आदरणीय अरुण जी, बेहतरीन गजल यह शेर खास पसंद हुए, दिली दाद कुबूल कीजिये

उम्र का ये पड़ाव अंतिम है,
सांस कोई भी आखिरी होगी,

आज छोड़ेगा दर्द भी दामन,
आज हासिल मुझे ख़ुशी होगी,

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 26, 2013 at 6:33am

आदरणीय अरुण भाई ,

पूरी गज़ल लाजवाब है, ढेरों बधाइयाँ


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Comment by शिज्जु "शकूर" on December 25, 2013 at 10:22pm

भाई अरूणजी बेहतरीन ग़ज़ल है बधाई स्वीकार करें
//उम्र का ये पड़ाव अंतिम है,
सांस कोई भी आखिरी होगी,//

बस यहाँ मैं कहना चाहूँगा

"हर नफ़स पहली है वही आखिर
 जिन्दगी है तो जिन्दगी होगी"

Comment by MAHIMA SHREE on December 25, 2013 at 9:55pm

नीर नैनों में मत खुदा देना,
सब्र होगा अगर हँसी होगी,... बहुत खूब... आदरणीय अनंत जी हार्दिक बधाई आपको ..

कृपया ध्यान दे...

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