For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल : अरुन शर्मा 'अनन्त'

बह्र : मुतकारिब मुसम्मन सालिम,

मदरसा बना या मदीना बना दे,
मुझे कीमती इक नगीना बना दे,

बिना मय के जैसे तड़पता शराबी,
समंदर सा प्यासा हसीना बना दे,

मुहब्बत की जिसमें रहे ऋतु हमेशा,
अगर हो सके वो महीना बना दे,

सुकोमल बदन से जरा मैं लिपट लूँ,
मेरे जिस्म को तू मरीना बना दे,
मरीना = मुलायम कपडा

लिखा हो जहाँ नाम तेरी कहानी,
ह्रदय की धरा को सफीना बना दे....
सफीना : किताब

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 707

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on November 20, 2013 at 10:38am

मुहब्बत की जिसमें रहे ऋतु हमेशा,
अगर हो सके वो महीना बना दे,
वाह !  बहुत खूब ! 

Comment by ram shiromani pathak on November 19, 2013 at 11:25pm

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति  आदरणीय भाई  जी हार्दिक बधाई  आपको///सादर प्रयास 

Comment by वेदिका on November 19, 2013 at 10:44pm

सुकोमल बदन से जरा मैं लिपट लूँ,
मेरे जिस्म को तू मरीना बना दे,

वाह! बहुत प्यारा शेअर! :-)

बधाई!!  

Comment by Neeraj Nishchal on November 19, 2013 at 7:15pm
बहुत सुन्दर सुन्दर ग़ज़ल कही
आदरणीय अरुण भाई
बधाई

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 19, 2013 at 6:55pm

मदरसा बना या मदीना बना दे,
मुझे कीमती इक नगीना बना दे,
ये कौन कह रहा है ? वैसे मुझे ईंट या पत्थर की कही बात लग रही है.

बिना मय के जैसे तड़पता शराबी,
समंदर सा प्यासा हसीना बना दे,
दोनों मिसरों में बहुत बढिया राबिता नहीं बन रहा है.  वैसे, भाईजी, समन्दर सा प्यासा  हसीना ? .. जय हो.. 

मुहब्बत की जिसमें रहे ऋतु हमेशा,
अगर हो सके वो महीना बना दे,
बहुत खूब !

सुकोमल बदन से जरा मैं लिपट लूँ,
मेरे जिस्म को तू मरीना बना दे,
:-))))... मुझसे भले चाँदी के बटन तेरे जो कुर्ते में तूने लगाये.. :-)))) .. मज़ा आगया.

लिखा हो जहाँ नाम तेरी कहानी,
ह्रदय की धरा को सफीना बना दे,
इसका क्या मतलब हुआ, भाईजी ? कहानी के हिसाब से तो लिखी हो होना चाहिये न. वैसे मुझे कुछ पता नहीं चला सो उलझन में हूँ.

कोशिशों के लिए बधाई और शुभकामनाएँ
शुभेच्छाएँ
 

Comment by Saarthi Baidyanath on November 19, 2013 at 5:08pm

इंशा-अल्लाह ...मुझे कीमती इक नगीना बना दे!.. बहुत खूब जनाब :)

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 19, 2013 at 2:53pm

बहुत ख़ूब ... बधाई 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on November 19, 2013 at 1:07pm

क्या बात है आदरणीय अरुण भाई

ग़ज़ब के अशआर कहे हैं आपने

लाजवाब

हर इक अशआर पर दिली दाद क़ुबूल करें जय हो

Comment by AVINASH S BAGDE on November 19, 2013 at 10:46am

सुकोमल बदन से जरा मैं लिपट लूँ,

मेरे जिस्म को तू मरीना बना दे, ..kya najuk khayal hai 

sunder/umda gazalअरुण जी ..

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 18, 2013 at 4:57pm

क्या रूमानियत भरा अंदाज सुकोमल बदन से जरा मैं लिपट लूँ,
मेरे जिस्म को तू मरीना बना दे,..भाई वह 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
4 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
4 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
4 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
9 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
9 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
11 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
14 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
15 hours ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
15 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
15 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
15 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
15 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service