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नव युवा हे ! चिर युवा .................. . (अन्नपूर्णा बाजपेई )

नव युवा हे ! चिर युवा तुम

उठो ! नव युग का निर्माण करो ।

जड़ अचेतन हो चुका जग,

तुम नव चेतन विस्तार करो ।

पथ भ्रष्ट लक्ष्य विहीन होकर

न स्व यौवन संहार करो ।

उठो ! नव युग का निर्माण करो ...............

दीन हीन संस्कार क्षीण अब

तुम संस्कारित युग संचार करो ।

अभिशप्त हो चला है भारत !!

उठो ! नव भारत निर्माण करो ।

नव युवा हे ! चिर युवा ..............................

गर्जन तर्जन  ढोंगियों का

कर रहा मानव मन क्रंदन ।

सिंहों सी गर्जन अब हुंकार भरो

उठो सत्य प्रति मूर्ति नरेंद्र बनो ।

नव युवा हे ! चिर युवा ........................

गूँजे हुंकार कि काँप उठे दुष्प्रहरी

न मृगछौना बन शावक केसरी ।

चंहु दिशि गुंजित कर दे

ऐसी सिंह दहाड़ करो ।

नव युवा हे! चिर युवा.............

 

अप्रकाशित एवं मौलिक

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Comment by annapurna bajpai on November 10, 2013 at 3:38pm

आदरणीय जितेंद्र जी , आ0 अरुण निगम जी , आ0 केवल भाई जी एवं आदरणीय विजय निकोर जी आप सभी का हार्दिक आभार । 

Comment by vijay nikore on November 10, 2013 at 1:43pm

नव युवाओं को सार्थक संदेश देती रचना के लिए बधाई, आदरणीया अन्न्पूर्णा जी।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 10, 2013 at 11:44am

आ0 अन्नपूर्णा जी, सादर प्रणाम! अतिसुन्दर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई। सादर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on November 10, 2013 at 9:24am

देश के युवाओं के लिए सुन्दर आव्हान . बधाई.....................

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 10, 2013 at 12:42am

आज के युवा वर्ग को सटीक सन्देश देती रचना, हार्दिक बधाई स्वीकारे आदरणीया अन्नपूर्णा जी

Comment by annapurna bajpai on November 9, 2013 at 10:56pm

आ0 सुशील जी आपका आभार । 

Comment by annapurna bajpai on November 9, 2013 at 10:56pm

आ0 अखिलेश जी आपका आभार । 

Comment by annapurna bajpai on November 9, 2013 at 10:55pm

आ0 अरुण जी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by annapurna bajpai on November 9, 2013 at 10:55pm

आ0 शीजू जी आपका हरदिक आभार । 

Comment by annapurna bajpai on November 9, 2013 at 10:54pm

आ0 मीना जी आपका हार्दिक आभार । 

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