For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गजल - जिनके मुँह में नहीं बतीसी भार्इ साहब

जिनके मुँह में नहीं बतीसी भार्इ साहब ,
चले बजाने वो भी सीटी भार्इ साहब।

.

भारी भरकम हाथी पर भारी पड़ती है ,
कभी - कभी छोटी सी चींटी भार्इ साहब।

.

काट रहे हैं हम सबकी जड धीरे-धीरे ,
करके बातें मीठी - मीठी भार्इ साहब।

.

मंहगार्इ डार्इन का ऐसा कोप हुआ है ,
पैंट हो गर्इ सबकी ढीली भार्इ साहब।

.

प्रजातंत्र में गूँगी लड़की का बहुमत से ,
रखा गया है नाम सुरीली भार्इ साहब।

.

सबको रार्इ खुद को पर्वत समझ रहा है ,
एक घूँट क्या उसने पी ली भार्इ साहब।

.

पहले कफर््यू हटे तभी तो जले , घरों में ,
फिर से चूल्हा और अंगीठी भार्इ साहब।

.

मौलिक अप्रकाशित

Views: 585

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on October 25, 2013 at 6:26pm

आदरणीय श्री विजय मिश्र जी,सुशील जोशी जी,केवल प्रसाद जी,वैधनाथ सारथी जी, गिरिराज भण्डारी जी ,अरूणशर्मा अनन्त जी,डा आसुतोष जी ,सौरभ पाण्डे जी और सुश्री अन्नपूर्णा जी आप सबको तहे दिल से शुकि्रया अदा करता हूँ। दरअसल यह गजल मैने एक खास मकसद से ब्लाग में डाली है। यह गजल मात्रिक छन्द पर आधारित है। जैसा कि आप सब महानुभाव जानते हैं कि इस गजल की बहर फैलुन पर आधारित होनी चाहिये। परन्तु आजकल हिन्दी गजलकारों ने  अपनी सुविधानुसार फैलुन को फइलुन में बदल कर इस प्रकार की गजल को वार्णिक छन्द के नियम में फिट कर देते हैं। और इस प्रकार गणना 1111 करते हैं। परन्तु यह बहस का विषय है। जहाँ उदर्ू के शायर इसे रिजेक्ट कर देते हैं वही हिन्दी के गजलकारों ने सही ठहरा कर मान्यता दे दी है। विचारणीय यह है कि क्या यह मात्रिक छन्द पर आधारित गजल में वो सब बातें नहीं है जो उदर्ू के वार्णिक छन्दों की गजलों में है। और यदि है तो क्या इसे कूड़ेदान में सिर्फ इसलिये फेंक देना चहिये क्योंकि गजल फैलुन की विषम संख्या का पालन न करके लकीर से हटकर है। आशा है अपने विचार अवश्य प्रकट करेंगे। 

Comment by विजय मिश्र on October 25, 2013 at 12:33pm
आनंद आ गया भाई साहब , राम अवधजी बहुत वाजीब आधार दिया है आपने इस रचना के व्यंगात्मक शिल्प को . बधाई हो ..... .
Comment by Sushil.Joshi on October 25, 2013 at 4:41am

बहुत सुंदर गज़ल प्रस्तुत की है आ0 राम अवध जी.... बधाई हो....

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 24, 2013 at 8:46pm

 आ0 राम अवध भार्इ जी,  सादर प्रणाम!  वाह! बहुत खूब गजल कही है।............ हार्दिक बधार्इ स्वीकारें।  सादर,   

Comment by Saarthi Baidyanath on October 24, 2013 at 7:06pm

माननीय ..सुन्दर प्रस्तुति हेतु बधाई ..

मंहगार्इ डार्इन का ऐसा कोप हुआ है ,
पैंट हो गर्इ सबकी ढीली भार्इ साहब...बढ़िया :)


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 24, 2013 at 5:45pm

आदरणीय राम भाई , बहुत सुन्दर रदीफ चुना है आपने , पूरी गज़ल बेहतरीन कही है !!!! आपको हार्दिक बधाई !!!!!

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 24, 2013 at 5:00pm

आदरणीय राम अवध सर अलग अंदाज में बहुत ही बेहतरीन ग़ज़ल कही है आपने सभी अशआर बेहद उम्दा बन पड़े हैं. आपसे विन्रम अनुरोध है कि यदि ग़ज़ल लिखते हैं तो साथ में बह्र अवश्य लिखें ताकि सीखने वाले मित्रों को कुछ कहने और समझने  में आसानी हो सके. इस सुन्दर ग़ज़ल हेतु दिली दाद कुबूल फरमाएं.

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 24, 2013 at 4:19pm

आदरणीय राम अवध जी ..लाजबाब ग़ज़ल ..पढ़कर आनंद आ गया ..तहे दिल बाधाही के साथ 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 24, 2013 at 1:46pm

एक बढिया ग़ज़ल के लिए धन्यवाद भाईसाहब !

वैसे फेलुन की संख्या आपने विषम रखी होती. जो कि परिपाटी है.

शुभ-शुभ

Comment by annapurna bajpai on October 24, 2013 at 12:53pm

क्या  खूब गजल कही आ0 राम अवध जी बहुत बधाई आपको । 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Friday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Friday
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Jun 6
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Jun 5
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service