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इस मंच पर ग़ज़ल कहने का प्रथम प्रयास.. एक तरही ग़ज़ल .."ज़रूरत से ज़ियादा क्यूँ करें हम?"

1222, 1222, 122.
.

ज़रूरत से ज़ियादा क्यूँ करें हम?
लहू दिल से निचोड़ा क्यूँ करें हम?
.

फ़ना हो जाएगा सबकुछ जहां में,
ये झूठा फिर दिखावा क्यूँ करें हम?
.

उगेंगे एक दिन कांटें ही कांटें,
ज़हन में याद बोया क्यूँ करें हम?
.

नहीं परवाह है उनको हमारी,
बिना कारण ही रोया क्यूँ करें हम?
.

हमारे काम खुद ही बोलतें है,
ज़ुबानी कोई दावा क्यूँ करें हम?
.

जुदा है रास्ते तुमसे हमारे,
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम?
.

तुम्हारे सामने हस्ती नहीं कुछ,
मगर इज्ज़त का सौदा क्यूँ करें हम?? 
.

अभी तो ज़ख्म अपने सब हरे है,
बता इनको कुरेदा क्यूँ करें हम?? 
.

मिलेगी कौनसी दौलत यहाँ पर,
किसी की क़ब्र खोदा क्यूँ करें हम? 
.

हकीक़त है पता ज़न्नत की हमको,
वहाँ का फिर इरादा क्यूँ करें हम? 
.

चलो अब ‘नूर’ चलते है यहाँ से,
किसी का वक़्त ज़ाया क्यूँ करें हम? 
.
निलेश 'नूर'
मौलिक एवं अप्रकाशित 

Views: 780

Comment

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 17, 2013 at 10:54pm

धन्यवाद आदरणीय सौरभ जी एवं डॉ प्राची जी. स्नेह बनाए रखिये.
आभार  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 17, 2013 at 9:04pm

आ० निलेश जी 

बहुत बढ़िया लगी आपकी ग़ज़ल..सहजता से बातें करती हुई.

कई अशआर बहुत पसंद आये 

हार्दिक बढ़ाई 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 17, 2013 at 6:51pm

नीलेश नूर साहब, आपकी कोई पहली ग़ज़ल या प्रस्तुति से गुजर रहा हूँ. इस ग़ज़ल पर बहुत-बहुत बधाई स्वीकारिये.
सादर

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 16, 2013 at 5:23pm

शुक्रिया राहुल जी 

Comment by RAHUL VERMA on October 16, 2013 at 5:05pm

.

तुम्हारे सामने हस्ती नहीं कुछ,
मगर इज्ज़त का सौदा क्यूँ करें हम??

---वाह सचमुच लाजवाब शे'र बन पड़ा है ..............पूरी ग़ज़ल ही यकीनन बहुत उम्दा है

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 16, 2013 at 1:47pm

धन्यवाद बृजेश जी, विजय जी.... आभार   

Comment by बृजेश नीरज on October 15, 2013 at 7:04pm

 अच्छी ग़ज़ल हुई है! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by vijay nikore on October 15, 2013 at 7:00pm

अति सुन्दर गज़ल। बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 15, 2013 at 3:57pm

आदरणीय नीलेश जी तहे दिल से आभार आपका ,एक कमाल की ग़ज़ल हुई |

Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 15, 2013 at 3:42pm

धन्यवाद आदरणीय मिश्र जी 

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