For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

उलटी इनकी चाल - आज की राजनीतिक घटना के सन्दर्भ में

चाल चला जब हंस की, बगुला बहुत सयान

बगुला खाया मात तब, खोया अपना मान

खोया अपना मान, इस्तीफे की है मांग

बात बड़ेन की मान, है टूटी छोटी  टांग

कह सागर कविराय, नेता इनका है बाल

इन्हीं को अब पड़ी, है उलटी इनकी चाल

आशीष ( सागर सुमन ) 

मौलिम एवं अप्रकाशित

Views: 647

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 2, 2013 at 11:13pm

प्रस्तुत कुण्डलिया छंद विधान की दृष्टि से दोषपूर्ण है. मेरा इशारा रोला वाले भाग की ओर है.  इस पर अभी तक किसी का ध्यान नहीं गया. जबकि आदरणीय रविकर जी ने इशारा किया भी तो अत्यंत गूह्य रूप में.  दोहे वाले भाग में भी बगुला  शब्द का दो बार आना छंद के कुल प्रभाव को कम करता हुआ दीख पड़ता है.

दूसरे, साहित्यिक मंचों पर शुद्ध राजनैतिक घटनाओं का सीधा वर्णन उचित नहीं माना जाता. व्यवस्था पर बातें करना एक ब ह जबकि राजनैतिक पार्टियों पर सीधी बातें रचनाकार के स्वर को हल्का कर देती हैं. बातें इशारों में हों यही उउचित है. इसके प्रति जागरुकता और संवेदनशीलता अपरिहार्य है.

पुराने सदस्य इस बात को जानते हैं, लेकिन इस तथ्य को बार-बार कहने की आवश्यकता इसी कारण पड़ती है कि नये सदस्य कई तथ्यों को सतत संलग्नता के बाद ही जान पाते हैं.

शुभेच्छाएँ.

Comment by विजय मिश्र on September 30, 2013 at 12:05pm
बहुत ही सुंदर कथ्य , रही-सही रविकरजी ने पूरी कर दियी . दोनों जनों को साधुवाद .
Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on September 30, 2013 at 11:55am

वाह वाह आदरणीय ग़ज़ब की रचना इस रचना पर आपको बहुत बहुत बधाई

आदरणीय रविकर सर और आदरनी आशीष जी को भी प्रातक्रिया छंद रचने के लिए हार्दिक हार्दिक बधाई जोरदार

मजा आ गया

Comment by रविकर on September 30, 2013 at 11:19am

वाह वाह वाह आशीष जी-
मजेदार रोले से आपने पूरी की कुण्डलिया
बधाई आदरणीय-

धत मौनी युवराज, बड़े गुस्से में लालू |
मारक मिर्ची तेज, चाट ले किन्तु कचालू |

सुबह मचाये शोर, नहीं महतारी जागी |
शीघ्र बुला के प्रेस, गोलियां भर भर दागी ||

Comment by Ashish Srivastava on September 30, 2013 at 9:57am
Comment by डॉ. अनुराग सैनी on September 29, 2013 at 2:37pm

शुभ कामनाये उत्कृष्ट लेखन !

Comment by Ashish Srivastava on September 28, 2013 at 11:45pm

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव : जी बहुत बहुत आभार 

Comment by Ashish Srivastava on September 28, 2013 at 11:45pm

रविकर: आदरनीय, रविकर जी आपके छंद कमेन्ट के आभार स्वरुप इन्हीं दो लाइनों को आपका आदेश मानकर आपको समर्पित कर रहा हूँ 

दागी अध्यादेश पर, तीन दिनों में खाज |
श्रेष्ठ मुखर-जी-वन सदा, धत मौनी युवराज |

धत मौनी युवराज, कहाँ पे मुँह को खोले
माकन को फटकार, प्रेस में कर्कश बोले  
मर्यादा को छोड़ , खुद भी हो गये बागी 
नौटंकी क्यूँ ये जब , अध्यादेश ही दागी 

अंतिम चार लाइन द्वारा आशीष ( सागर सुमन ) 

Comment by रविकर on September 28, 2013 at 7:55pm

बढ़िया कटाक्ष -
आदरणीय शुभकामनायें-

दागी अध्यादेश पर, तीन दिनों में खाज |
श्रेष्ठ मुखर-जी-वन सदा, धत मौनी युवराज |

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 28, 2013 at 7:18pm

सामयिक विषय पर तीखा व्यंग्य , बधाई  आशीष भाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
Monday
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
Friday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
Friday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
Mar 12
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Mar 12

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Mar 11
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Mar 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service