For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शर्म से हम आँख मीचे क्यूँ रहें

शर्म से हम आँख मीचे क्यूँ रहें

दौड़ है सोहरत की पीछे क्यूँ रहें

 

तब हुए पैदा जमीं पे अब मगर

हौसलों के पर हैं नीचे क्यूँ रहें

 

सच का लज्जत चख चुके हैं हम यहाँ

फिर बता दो हम भी तीखे क्यूँ रहें

 

जानते हैं फल में कीड़े कब लगे

इस कदर फिर हम भी मीठे क्यूँ रहें

 

जिन लकीरों ने कराई जंग है

“दीप” अब तक उनको खींचे क्यूँ रहें

 

संदीप कुमार पटेल “दीप”

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 1033

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by annapurna bajpai on September 23, 2013 at 7:48pm
आदरणीय संदीप जी बहुत बढ़िया गजल , सभी अशर गहरे भावों को बयां करता हुआ । आपको बहुत बधाई ।
Comment by Meena Pathak on September 23, 2013 at 7:34pm

बहुत सुन्दर गज़ल .. बधाई आप को 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on September 23, 2013 at 7:21pm

खूबसूरत ग़ज़ल की बधाई संदीप भाई। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 23, 2013 at 5:44pm

आदरणीय गिरिराज जी मेरी बात छोड़िये यहाँ गुणीजनों और मंच के सभी जानकारों के कहने के बाद भी रचनायें ब्लॉग पोस्ट में यथावत हैं रचनाकार या तो सुझावों से सहमत नहीं हैं या संपादित करने की जहमत नही उठाना चाहते, यह प्रबंधन समिति से जानना चाहता हूँ क्या एक बार पोस्ट करने के बाद त्रुटियों को दूर कर संपादित रचनाओं को पोस्ट करने की अनुमति नही है?? मैं आदरणीय संदीप जी से मुआफ़ी माँगना चाहता हूँ कि मैंने ये प्रश्न उनकी ग़ज़ल वाले भाग में किया है। 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 23, 2013 at 5:43pm

आदरणीय गिरिराज सर शोहरत भी मान्य है और उसका वज्न भी 22 है इसे आप यूँ पढ़िये कि ह अर्द्धाक्षर है, सुझाव ज़रूर दिया जाना चाहिये, यहाँ "सोहरत" को "शोहरत" या "शुह्रत" करने का सुझाव, 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 23, 2013 at 5:22pm

आदरणीय शिज्जू भाई , शोहरत  लिखा हो तो भी हमे सुधार कर शुह्रत पढ़ ले ना चाहिये , या  सुधार लेने की सलाह देनी चाहिये ?

Comment by रविकर on September 23, 2013 at 5:20pm

हौसलों के पर हैं नीचे क्यूँ रहें-

जबरदस्त भाव-
शुभकामनायें प्रियवर "दीप"


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 23, 2013 at 4:58pm

आदरणीय गिरिराज जी दरअस्ल सही शब्द "शुह्रत" होता है जिसे "शोहरत" भी लिखा जाता है इसका वज्न 22 होता है इस लिहाज से मिसरा बाबह्र है


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 23, 2013 at 4:53pm

वाह आदरणीय संदीपजी एक और खूबसूरत ग़ज़ल बहुत बढ़िया
//जानते हैं फल में कीड़े कब लगे
इस कदर फिर हम भी मीठे क्यूँ रहें// बहुत खूब दिली दाद कुबूल करें,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 23, 2013 at 11:12am

आदरणीय सन्दीप भाई , बहुत अच्छी गज़ल कही है बधाई , सलीम भाई सही कह रहे है , दोनो मिसरों को देख लीजिये ,

दौड़ है सोहरत की पीछे क्यूँ रहें - इस मिसरे मे मात्रा भी देख लें  !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
2 hours ago
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
5 hours ago

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . घूस

दोहा सप्तक. . . . . घूस बिना कमीशन आजकल, कब होता है काम । कैसा भी हो काम अब, घूस हुई है आम ।। घास…See More
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार। मुझे ऐसी ही एक चर्चा की अपेक्षा थी। आवश्यकता महसूस हो रही थी। हार्दिक धन्यवाद और…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के सभी सम्मानित सदस्यों को सादर नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर सर द्वारा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय सदस्यों को नमस्कार, एक महत्वपूर्ण चर्चा को आरम्भ करने के लिए प्रबन्धन समिति बधाई की…"
yesterday
Admin posted a discussion

ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा

साथियों,विगत कई माह से ओ बी ओ लाइव आयोजनों में कतिपय कारणवश सदस्यों की भागीदारी बहुत ही कम हो रही…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय  अखिलेश जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । सहमत एवं संशोधित "
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय सुशीलजी हार्दिक बधाई। लगातार बढ़िया दोहा सप्तक लिख रहें हैं। घूस खोरी ....... यह …"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
Mar 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service