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सोये वीरों को जगाना चाहते हैं इसलिए "ग़ज़ल"

सोये वीरों को जगाना चाहते हैं इसलिए

वीर रस के गीत गाना चाहते हैं इसलिए

 

माँ बहन बेटी की इज्ज़त से न खेले अब कोई

इक कड़ा कानून लाना चाहते हैं इसलिए

 

मर न जाए कोई भी आदम दवा बिन भूख से

हम गरीबी को हटाना चाहते हैं इसलिए

 

हम विरोधी पश्चिमी तहजीब के हरदम रहे

संस्कृति अपनी बचाना चाहते हैं इसलिए

 

रक्त की नदियाँ बहें ना देश में दंगों से अब

रक्त में अब हम नहाना चाहते हैं इसलिए

 

राह में हुड़दंगियाँ जो कर रहे हैं नौजवाँ

बस अमन औ चैन पाना चाहते हैं इसलिए

 

ठोकरें हमनें जो खाई वो किसी को ना मिलें

राह से पत्थर उठाना चाहते हैं इसलिए  

 

ढूंढते चिंगारियाँ हैं हम अँधेरी राह में

“दीप” इक सच का जलाना चाहते हैं इसलिए

"मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on September 7, 2013 at 2:24pm

आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय वीर जी ......स्नेह यूँ ही बनाये रखिये

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on September 7, 2013 at 2:24pm

आपका बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीया अन्नपूर्णा जी ....सादर आभार

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on September 7, 2013 at 2:23pm

आपका बहुत बहुत आभार आदर्नेया सरिता जी ......सादर

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on September 7, 2013 at 2:23pm

आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय सिज्जू जी ....स्नेह बनाये रखिये

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 7, 2013 at 10:44am

वाह वाह प्रिय मित्रवर आनंद आ गया क्या खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने सभी के सभी अशआर लाजवाब हैं दिली मुबारकबाद कुबूल फरमाएं.

Comment by Meena Pathak on September 7, 2013 at 9:43am

बहुत सुन्दर ग़ज़ल .. बधाई

Comment by Anil Chauhan '' Veer" on September 7, 2013 at 6:15am

बहुत बढ़िया ग़ज़ल संदीप जी .... बधाई हो 

Comment by annapurna bajpai on September 6, 2013 at 11:51pm

आदरणीय संदीप जी बहुत सुंदर गजल के लिए बधाई । 

Comment by Sarita Bhatia on September 6, 2013 at 11:39pm

क्या बात बहुत बढ़िया अशआर संदीप जी ,बधाई स्वीकार करें 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 6, 2013 at 10:07pm

//ठोकरें हमनें जो खाई वो किसी को ना मिलें

राह से पत्थर उठाना चाहते हैं इसलिए//

बहुत बढ़िया संदीपजी बेहतरीन ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें

कृपया ध्यान दे...

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