For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

करें हम

मान अब इतना

सजा लें

माथ पर बिन्दी।

बहे फिर

लहर कुछ ऐसी

बढ़े इस

विश्व में हिन्दी।।

 

गंग सी

पुण्य यह धारा

यमुन सा

रंग हर गहरा

सुबह की

सुखद बेला सी

धरे है

रूप यह हिन्दी।।

 

मधुरता

शब्द आखर में

सरसता

भाव भाषण में

रसों की

धार छलके तो

करे मन

तृप्त यह हिन्दी।।

 

तोड़कर

बॅंध दासता के

सभी भ्रम

जाल भाषा के

बसा लें

प्रेम अब इसका

प्रथम हो

देश में हिन्दी।।

                - बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

 

Views: 857

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on September 6, 2013 at 11:51pm

आदरणीया महिमा जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by MAHIMA SHREE on September 6, 2013 at 10:10pm

गंग सी

पुण्य यह धारा

यमुन सा

रंग हर गहरा

सुबह की

सुखद बेला सी

धरे है

रूप यह हिन्दी।।.... वाह वाह बहुत ही सुंदर नवगीत बहुत-२ बधाई आपको ....

Comment by बृजेश नीरज on September 6, 2013 at 8:31pm

जी, यही वजह है जो प्रवाह में बाधा है। मैंने यही कहना चाहा था। इस खण्ड के शिल्प में भिन्नता ही कारण है। मैं दुरूस्त करने का प्रयास करता हूं।
सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 6, 2013 at 8:28pm

आदरणीय बृजेश जी 

आपने ५-९ के खण्डों में यति को रखा है 

पर सभी जगह ९ वाले खंड में पहला शब्द ३ मात्रा का है और इस वाक्यांश में ही २ मात्रा का ... 

Comment by बृजेश नीरज on September 6, 2013 at 8:26pm

आदरणीय निकोर साहब, आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on September 6, 2013 at 8:25pm

आदरणीय केवल भाई आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on September 6, 2013 at 8:23pm

आदरणीया प्राची जी आपका हार्दिक आभार!
दरअसल इस गीत की संरचना में मैंने पहली पंक्ति में 5 मात्रा और दूसरी में 9 मात्रा रखीं हैं इसलिए उस नियम का पालन नहीं कर सका।

//तोड़कर बंध दासता के//

इस पंक्ति में 'तोड़' के 21 होने और 'ड़' की उपस्थिति हो सकता है प्रवाह में बाधक बन रही हो। इसे दूर करने का प्रयास करता हूं।
सादर!

Comment by vijay nikore on September 6, 2013 at 7:34pm

//मधुरता

शब्द आखर में

सरसता

भाव भाषण में

रसों की

धार छलके तो

करे मन

तृप्त यह हिन्दी।।//

बहुत ही  सुन्दर रचना। बधाई।

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 6, 2013 at 7:31pm

आ0 बृजेश भाई जी,    वाह..वाह..बहुत सुन्दर सरस प्रस्तुति।    आपको बहुत-बहुत हार्दिक बधाई।  सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 6, 2013 at 7:23pm

आदरणीय बृजेश जी 

मातृभाषा की शान को समर्पित बहुत सुन्दर नवगीत..वाह! 

सुबह की

सुखद बेला सी

धरे है

रूप यह हिन्दी।।..................बहुत ताजगी भरी पंक्तियाँ , अति सुन्दर! मधुर !

 

मधुरता

शब्द आखर में

सरसता

भाव भाषण में................वाह ! 

रसों की

धार छलके तो

करे मन

तृप्त यह हिन्दी।।.................क्या बात है, बहुत सुन्दर मनमुग्ध हो गया इस प्रवाह पर इस लालित्य पर 

किन्तु ,

तोड़कर

बॅंध दासता के..............सिर्फ इस वाक्यांश में प्रवाह बाधित है, शब्द समुच्चय को साधने से यह सही हो जाएगा  ५.२.५.२ की जगह 

यदि ५.३.४.२. मात्रिक क्रम साधने का प्रयत्न हो तो, यह सही हो सकता है.. सम शब्दों के बाद सम शब्द और विषम के बाद विषम शब्द लेने से गेयता निर्बाध रहती है.

इस अतिसुन्दर समर्पित सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई 

सादर शुभकामनाएँ 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Admin posted discussions
46 minutes ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
1 hour ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
2 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
11 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
yesterday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service