For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

करें हम

मान अब इतना

सजा लें

माथ पर बिन्दी।

बहे फिर

लहर कुछ ऐसी

बढ़े इस

विश्व में हिन्दी।।

 

गंग सी

पुण्य यह धारा

यमुन सा

रंग हर गहरा

सुबह की

सुखद बेला सी

धरे है

रूप यह हिन्दी।।

 

मधुरता

शब्द आखर में

सरसता

भाव भाषण में

रसों की

धार छलके तो

करे मन

तृप्त यह हिन्दी।।

 

तोड़कर

बॅंध दासता के

सभी भ्रम

जाल भाषा के

बसा लें

प्रेम अब इसका

प्रथम हो

देश में हिन्दी।।

                - बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

 

Views: 986

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on September 6, 2013 at 11:51pm

आदरणीया महिमा जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by MAHIMA SHREE on September 6, 2013 at 10:10pm

गंग सी

पुण्य यह धारा

यमुन सा

रंग हर गहरा

सुबह की

सुखद बेला सी

धरे है

रूप यह हिन्दी।।.... वाह वाह बहुत ही सुंदर नवगीत बहुत-२ बधाई आपको ....

Comment by बृजेश नीरज on September 6, 2013 at 8:31pm

जी, यही वजह है जो प्रवाह में बाधा है। मैंने यही कहना चाहा था। इस खण्ड के शिल्प में भिन्नता ही कारण है। मैं दुरूस्त करने का प्रयास करता हूं।
सादर!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 6, 2013 at 8:28pm

आदरणीय बृजेश जी 

आपने ५-९ के खण्डों में यति को रखा है 

पर सभी जगह ९ वाले खंड में पहला शब्द ३ मात्रा का है और इस वाक्यांश में ही २ मात्रा का ... 

Comment by बृजेश नीरज on September 6, 2013 at 8:26pm

आदरणीय निकोर साहब, आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on September 6, 2013 at 8:25pm

आदरणीय केवल भाई आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on September 6, 2013 at 8:23pm

आदरणीया प्राची जी आपका हार्दिक आभार!
दरअसल इस गीत की संरचना में मैंने पहली पंक्ति में 5 मात्रा और दूसरी में 9 मात्रा रखीं हैं इसलिए उस नियम का पालन नहीं कर सका।

//तोड़कर बंध दासता के//

इस पंक्ति में 'तोड़' के 21 होने और 'ड़' की उपस्थिति हो सकता है प्रवाह में बाधक बन रही हो। इसे दूर करने का प्रयास करता हूं।
सादर!

Comment by vijay nikore on September 6, 2013 at 7:34pm

//मधुरता

शब्द आखर में

सरसता

भाव भाषण में

रसों की

धार छलके तो

करे मन

तृप्त यह हिन्दी।।//

बहुत ही  सुन्दर रचना। बधाई।

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 6, 2013 at 7:31pm

आ0 बृजेश भाई जी,    वाह..वाह..बहुत सुन्दर सरस प्रस्तुति।    आपको बहुत-बहुत हार्दिक बधाई।  सादर,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 6, 2013 at 7:23pm

आदरणीय बृजेश जी 

मातृभाषा की शान को समर्पित बहुत सुन्दर नवगीत..वाह! 

सुबह की

सुखद बेला सी

धरे है

रूप यह हिन्दी।।..................बहुत ताजगी भरी पंक्तियाँ , अति सुन्दर! मधुर !

 

मधुरता

शब्द आखर में

सरसता

भाव भाषण में................वाह ! 

रसों की

धार छलके तो

करे मन

तृप्त यह हिन्दी।।.................क्या बात है, बहुत सुन्दर मनमुग्ध हो गया इस प्रवाह पर इस लालित्य पर 

किन्तु ,

तोड़कर

बॅंध दासता के..............सिर्फ इस वाक्यांश में प्रवाह बाधित है, शब्द समुच्चय को साधने से यह सही हो जाएगा  ५.२.५.२ की जगह 

यदि ५.३.४.२. मात्रिक क्रम साधने का प्रयत्न हो तो, यह सही हो सकता है.. सम शब्दों के बाद सम शब्द और विषम के बाद विषम शब्द लेने से गेयता निर्बाध रहती है.

इस अतिसुन्दर समर्पित सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई 

सादर शुभकामनाएँ 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
yesterday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service