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रुँधे गले से मेरा नाम ले गयी

वो सफ़र की घड़ी
वो मुहब्बत की छड़ी
वो श्वेत मुस्कान की लड़ी
जैसे मानो दुनिया ही खड़ी

ऐसी अदा दिखलाके वो
जाने कहाँ गुम हो गयी
मुझे तन्हा छोड़ के गयी
मुझे बेसहारा कर के गयी..

उसका नज़रें चुराना
शर्म से पलकें झुकाना
हर अदा को छुपाना
जैसे खुद ही को झुठलाना

इतना करके भी वो खुद को रोक ना सकी
जैसे रुँधे गले से मेरा नाम ले गयी
खुद को झुठलाके वो खुद ही गुम हो गयी

वो अंजानी नगर
वो अनचाहा सफ़र
वो बंजर जिगर
जिसमे उठी लहर
लहर उठाके वो शमां को
परवाना दिखा ले गयी
मेरे दिल पर वो बिजली गिरा के गयी

उसके लहर को मैं भी सह ना सका
बिन कुछ बोले मैं खुद को रोक ना सका
चाहत का प्याला उसके सामने किया
उसने हंसकर धीरे से उसे टाल दिया

उसकी हरकत से मेरी आँखे नम हो गयी
उसके जाने के बाद लहर और बढ़ गयी
जैसे रुँधे गले से मेरा नाम ले गयी
आँखों से बिन बादल बरसात
करा के गयी…………………

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Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 23, 2010 at 10:16am
उसका नज़रें चुराना
शर्म से पलकें झुकाना
हर अदा को छुपाना
जैसे खुद ही को झुठलाना,
Kaha chhupa kar rakhey they hujur, Dil ka dard ko bahney dijiyey, rokiyey nahi, achha likh rahey hai ,likhatey rahey, aagey bhi intjaar raheyga aapki rachnao ka ,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on May 22, 2010 at 11:56pm
वो सफ़र की घड़ी
वो मुहब्बत की छड़ी
वो श्वेत मुस्कान की लड़ी
जैसे मानो दुनिया ही खड़ी
bahut hi shaandar abhishek bhai......bahut dino baad aapki rachna aayi aur wo bhi ekdam dhamakedaar...bahut bahut dhanyabaad yahan post karne ke liye
Comment by Biresh kumar on May 22, 2010 at 11:28pm
उसका नज़रें चुराना
शर्म से पलकें झुकाना
हर अदा को छुपाना
जैसे खुद ही को झुठलाना
masha allah!! subhan allah!!!
Comment by Admin on May 22, 2010 at 5:27pm
उसकी हरकत से मेरी आँखे नम हो गयी
उसके जाने के बाद लहर और बढ़ गयी
जैसे रुँधे गले से मेरा नाम ले गयी
आँखों से बिन बादल बरसात
करा के गयी…………………
वाह अभिषेक बाबू, अच्छा लिखे है , आप अगर रेगुलर कुछ कुछ लिखते रहेंगे तो आपकी लेखन मे और भी सुधार होगा, अभी तो हम सभी भाग्यशाली है की ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार मे अच्छे-२ साहित्यकार लोग है जो हम लोगो को अच्छा लिखने मे अपने कमेंट्स और chat के द्वारा मदद भी कर सकते है, बहुत बढ़िया लगा आपका खुबसूरत पोस्ट देख कर , पर्यास बहुत बढ़िया है , आगे भी आप की रचना का इन्तजार रहेगा धन्यवाद,
Comment by Rash Bihari Ravi on May 22, 2010 at 4:58pm
bah gajab dhah gaila bhai man khush ho gail

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