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!!! यही ‘सत्यम’ शिवम् सुन्दर हुआ है !!!

!!! यही ‘सत्यम’ शिवम् सुन्दर हुआ है !!!
बह्र- 1222 1222 122

सकल दुनिया दिखाता जा रहा हूं।
कयामत का सफर सुलझा रहा हूं।।

मेरे मौला मैं तुझको क्या बताऊं,
रूहानी पीर के जैसा रहा हूं।

तेरी चौखट सदा मुझको लुभाती,
कभी तीखा कभी मीठा रहा हूं।

जहां में और भी गम हैं कहूं क्या?
जहां मेला वहीं तन्हा रहा हूं।

मेरी मां ने कहा था सुब्ह उठकर,
पिलाना आब, वो दरिया रहा हूं।

अमीरी छोड़ कर मुफलिस कहाऊं,
तेरे सद् द्वार का सच्चा रहा हूं।

नहीं भाता मुझे अब कोई वादा,
सदा कर्मो में मैं डूबा रहा हूं।

तेरी उल्फत में रंजो गम भुला कर,
अभी तक प्यार को समझा रहा हूं।

बयानी का सदा दस्तूर आसां,
यहां मजहब लड़ें पछता रहा हूं।

कड़ी मिन्नत दुआ बनकर फली जो,
तेरी यादों से दिल बहला रहा हूं।

यही ‘सत्यम’ शिवम् सुन्दर हुआ है,
दया करूणा लुटा हॅसता रहा हूं।

के0पी0सत्यम/मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 2, 2013 at 7:29pm

आ0 प्राची मैम जी, सादर प्रणाम!    आपका अपार स्नेह और उत्साहवर्धन पाकर मैं धन्य हो गया।  आपका हृदयतल से बहुत-बहुत आभार।  सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 2, 2013 at 7:26pm

आ0 वीनस भाई जी, सादर प्रणाम!   भाई जी, मैं सदा ही अपकी  टिप्पणी को लालायित रहता हूं। आपका इशारा मात्र मेरे लिए संजीवनी का कार्य करता है।  भाई जी, आपका अपार स्नेह और सुखद साथ पाकर मैं धन्य हो गया।  अब मैं कुछ-कुछ आश्वस्त हो रहा हूं, अभी तो मुझे बहुत लम्बा सफर तय करना है।  बस आपका यूं ही स्नेह मिलता रहे।  आपका हृदयतल से बहुत-बहुत आभार।  सादर

Comment by वीनस केसरी on September 2, 2013 at 4:17am

तेरी चौखट सदा मुझको लुभाती,
कभी तीखा कभी मीठा रहा हूं।

जहां में और भी गम हैं कहूं क्या?
जहां मेला वहीं तन्हा रहा हूं।

वाह वा हुज़ूर आप तो हर विधा में हैरान किये हुए हैं ....

अचनाक ही आप अपने पूर्व की रचनाओं से कई गुना अच्छी रचनाएँ प्रस्तुत कर रहे है
ये क्या जादू किया है ???
कोई जादू टोना का मामला तो नहीं है ???


वाह वा ,,,,, आनंद आ गया
बधाई स्वीकारें


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 31, 2013 at 9:20am

आ० केवल प्रसाद जी 

बहुत सुन्दर गज़ल हुई है... कई शेर बहुत पसंद आये 

शुभकामनाएँ 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 31, 2013 at 8:58am

आ0 वंदना जी,  सादर प्रणाम!  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन हेतु आपका हृदयतल से आभार।  सादर,

Comment by vandana on August 31, 2013 at 7:13am

बहुत सुन्दर आदरणीय केवल जी 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 30, 2013 at 8:24pm

आ0 लड़ीवाला सर जी,  आपके स्नेह, उत्साहवर्धन और आशीष हेतु आपका हार्दिक आभार।   सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 30, 2013 at 8:22pm

आ0 राजेश भाई जी,  आपके स्नेह, उत्साहवर्धन और सुन्दर मार्गदर्शन हेतु आपका हार्दिक आभार। आपके विचारों और अपेक्षाओं पर अवश्य खरा उतरने की कोशिश करूंगा। बस यूं ही स्नेह बनाये रखिए।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 30, 2013 at 8:19pm

आ0 अरून अनन्त भाई जी,  आपके स्नेह, उत्साहवर्धन और सुन्दर मार्गदर्शन हेतु आपका हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 30, 2013 at 7:33pm

सत्यम शिवम् सुन्दरम भाव गजल प्रयास कर प्रस्तुति हेतु बधाई |

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