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तुम सोई

सपनों में खोई

अधर मंद मुस्काते हैं

ये सपने

चुपके से आकर

आखिर क्या कह जाते हैं।

 

बागों में

चंपा महकी है

मंद हवा

बहकी बहकी है

घनी रात को, तारे आकर

रूप नया दे जाते हैं।

 

रंग भरे

यह श्वेत चांदनी

कण कण में

इक मधुर रागिनी

नींद भरे बोझिल ये नयना

सुध बुध सब हर जाते हैं।

.

 - बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on August 25, 2013 at 8:46pm

आ0 बृजेश भाई  जी,  सादर प्रणाम!     वाह!   सुर ताल में हृदय स्पर्शी गीत! सुन्दर प्रस्तुति के लिए तहेदिल से बधाई स्वीकारें। सादर,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 25, 2013 at 4:49pm

बृजेश भाई , अति सुन्दर गीत रचना , वाह वाह् , आनन्द आ गया !! बहुत बधाई !!

Comment by बृजेश नीरज on August 25, 2013 at 2:55pm

आदरणीया मंजरी जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by mrs manjari pandey on August 25, 2013 at 2:27pm

    आदरणीय ब्रुजेश ी रात के ओस सी भीगी रचना . पढ कर सुकून लगा . हर्दिक बधाई

Comment by बृजेश नीरज on August 25, 2013 at 9:00am

आदरणीय आशुतोष जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on August 25, 2013 at 8:59am

आदरणीय जितेन्द्र जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 25, 2013 at 8:55am

आदरनीय नीरज जी ..अलंकारों से सजी मनमोहक भाव मई शसक्त रचना ...आनंद आ गया ...सदर बधाई 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 25, 2013 at 12:15am

अथाह सीमा तक के गहरे भाव रचना में समाये हुए है

बहुत बहुत बधाई  आदरणीय बृजेश जी!

Comment by बृजेश नीरज on August 24, 2013 at 11:11pm

आदरणीय नीरज जी आपके शब्दों ने बहुत बल दिया मुझे। आपने गाकर देखा और यह उस कसौटी पर खरी उतरी, यह जानकर संतुष्टि हुई। आपका हार्दिक आभार!

Comment by Neeraj Nishchal on August 24, 2013 at 10:08pm

संगीत में सजी सुरमयी आपकी कविता पढ़कर
आज ये ज़रूर सीखने को मिला की व्याकरण की
लय में आने पर कविता किस तरह संगीत में स्वतः
आ जाती है और शायद अगर कविता ठीक ठीक
संगीत में लिखी जाए तो शायद उसके
कदम व्याकरण की राहों पर भी ना डगमगाएं
पहली बार आपकी कविता मेरे गाने में आयी
है और जब एक लाइन को बार बार गाता हूँ
तो उसके भावों में डूबता हूँ , मेरे लिए ये
कविता का रसपान करना है , और एक
सुन्दर सुहानी रात की बहुत शीतल और बहुत
ठंडी अनुभूति हुयी आपकी कविता के गायन से ।
आदरणीय बृजेश जी
ह्रदय के अहो भाव से बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं ।

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