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याद आ गया फिर

मुझे मेरा बचपन ,

पिता  की उंगली थामे,

नन्हें कदमों से नापना,

दूरियाँ, चलते चलते ,

वो थक कर बैठ जाना ,

झुक कर फिर पिता का ,

मुझको गोदी उठाना ,

चलते चलते मेहनत का,

पाठ वो धीरे से समझाना ।

 

बच्चों पढ़ना है सुखदाई,

मिले इसी मे सभी भलाई,

पहले कुछ दिन कष्ट उठाना,

फिर सब दिन आनंद मनाना,

फिर आ गया याद, 

 उनका ये  गुनगुनाना ,

सिर पर वो उनका हाथ,

भर देता है मुझमे नई,

उमंग,तरंग और स्फूर्ति ।

 

एक हूक सी उठती है ,

आज उनको न अपने,

पास पाती हूँ ,

साया सा महसूस करती हूँ,

 इर्द गिर्द वो शायद ,

मेरे पिता का साया है ,

 किसी कष्ट मे  उनको

अपने पास ही पाया है ,

खुशियों मे उनको दूर ,

मुसकुराते पाया है ।

 

 

आज वो आँगन ,

एकदम खाली सा लगता है,

वो घर भी अब,

अजनबी सा लगता है ,

जिस के हर कोने मे ,

बसते थे मेरे पिता ...... अन्नपूर्णा बाजपेई

 

अप्रकाशित एवं मौलिक        

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Comment by annapurna bajpai on July 25, 2013 at 5:09pm

आदरणीय गुरु जी एवं आदरणीय आशुतोष मिश्रा जी उत्साह वर्धन के लिए हार्दिक आभार ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on July 25, 2013 at 6:38am

सचुमुच पिता का कोई बिकल्प नहीं है ..हर बच्चे की जिन्दगी में एक अहम् भूमिका होती है पिता की ..बहुत ही भाव प्रवणता के साथ उभारा है आपने अपने शब्दों के माध्यम से ..ढेर सारी बधाई के साथ 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 24, 2013 at 11:28pm

भावपूर्ण रचना प्रयास पर अतिशय बधाइयाँ, आदरणीया.

शुभ-शुभ

Comment by annapurna bajpai on July 23, 2013 at 7:40pm

adarniya vinita ji apka hardik abhar .

Comment by annapurna bajpai on July 23, 2013 at 7:40pm

adarniy laxaman prasad ji apka bahut abhar .

Comment by Vinita Shukla on July 23, 2013 at 7:33pm

सुन्दर और प्रेरक भावों से सज्जित रचना. बधाई अन्नपूर्णा जी.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 23, 2013 at 7:33pm

पिता का साया जिस दिन उठ जाता है, परिवार अनाथ सा महसूस करता है, घर आँगन खाली खाली सा लगता है,

कुछ दिन स्वजन अनमने से रहते है | इस भावो को सुन्दर रचना के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए हार्दिक 

बधाई स्वीकारे  अनुपमा बाजपई जी | सादर 

Comment by annapurna bajpai on July 23, 2013 at 6:00pm

aap sabhi adarniy mitron ko dhanyvad .

Comment by Shyam Narain Verma on July 23, 2013 at 11:29am
इस प्रस्तुति हेतु बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएँ...
Comment by बृजेश नीरज on July 22, 2013 at 11:29pm

बहुत भावपूर्ण रचना। आपको इस सुन्दर प्रयास पर हार्दिक बधाई!
रचना को कुछ समय और दीजिए। एडीटिंग से यह और निखर आएगी।
सादर!

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