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खा खाकर मोटी हुई,जैसे मोटी भैंस !
मै दुबला होता गया ,मेरे धन पे ऐश !!

सुबह शाम गाली सुनूँ ,हरदम करती चीट !
धोबी का सोटा उठा ,अक्सर देती पीट !!

मै घर का नौकर बना ,झेलूँ बस उपहास !
रूठ विधाता भी गये,जाऊं किसके पास !!

लगे लंकिनी सा मुझे ,उसका भद्दा फेस !
दिन में कितनी बार वॊ,बदले अपना भेष !!

अब तो देखो हद हुई ,झेलूँ कितनी त्रास
घर आते सुनना पड़ा ,करना है उपवास !!

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by ram shiromani pathak on June 30, 2013 at 5:17pm

आदरणीय भाई ब्रिजेश जी इत्ता डरावना कमेन्ट हाहा हाहा //और ऐसी कोई समस्या नहीं है फोबीया हो मेरे दुश्मनों को ///आप है साथ तो काहे का डर//हार्दिक आभार

Comment by बृजेश नीरज on June 30, 2013 at 5:07pm

राम भाई वाह! मजा आया पढ़कर आपके दोहे भी और उस पर हुई चर्चा भी!
एक बात नहीं समझ आयी आप कहते हैं कि आप शादीशुदा नहीं हैं लेकिन आपकी रचनाओं में बार बार स्त्री से मिला भय बार बार छलकता है। पत्नी नहीं है तो यह भय आप आयातित कहां से करते हैं और क्यों? कहीं फोबिया न हो जाए। :)))))))))))))))))))))))))

Comment by ram shiromani pathak on June 30, 2013 at 2:10pm

मुझे लग ही रहा था आदरणीय की कुन्ती दीदी मेरे साथ मज़ाक ही कर रही हैं //हार्दिक आभार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by sharadindu mukerji on June 30, 2013 at 2:49am

भाई राम शिरोमणि जी, कुंती जी ने आपको डराने का प्रयास कर आपसे विनोद किया है. निर्भय होकर लिखें पूरे आनंद के साथ. आपकी निष्कलुष रचना ने मंच पर फुलझरी की झड़ी लगा दी.....उसके प्रकाश में हम सभी को अपने अंदर झाँकने का अवसर मिला....विद्वानो का साथ मिलना भाग्य की बात है....लाभ अवश्य उठाएँ. शुभकामनाएँ.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 27, 2013 at 9:43pm

भाई रामशिरोमणि जी, आपके माध्यम से मैं सभी पाठकों को सूचित करता हूँ कि आप इस मुआमले में भाग्यशाली हैं कि आपके दोहों पर अक्सर बेहतर बातचीत हुई है और ज्ञानवर्द्धक प्रतिक्रियाएँ आयी हैं. सभी पाठकगण इस मंच पर आपके अबतक प्रस्तुत हुए दोहों पर की प्रतिक्रियाओं से दोहा शिल्प संबन्धी महत्वपूर्ण जानकारियाँ ले सकते हैं. जैसे कि मैं लाभान्वित हुआ हूँ.

शुभम्

Comment by ram shiromani pathak on June 27, 2013 at 9:28pm

प्रणाम सहित हार्दिक आभार आदरणीय सौरभ जी ,आदरणीय गणेश जी ,भाई वीनस जी ,आदरणीया प्राची जी *****

मैंने दोहा लिखते समय यह नहीं सोचा था आप सब का इतना ज्ञानवर्धक कमेन्ट आयेगा //आप सब का कोटि कोटि आभार ///आप सब का स्नेह और आशीर्वाद बना रहे यही ईश्वर से कामना है//सादर

Comment by ram shiromani pathak on June 27, 2013 at 9:16pm

हार्दिक आभार आदरणीया दीदी कुन्ती जी//एक बात पूछनी थी क्या आप चाहती है की आपका अनुज ऐसी तकलीफ झॆले // स्नेह यु ही बनाए रखें //सादर 

Comment by ram shiromani pathak on June 27, 2013 at 9:13pm

हार्दिक आभार आदरणीय विजय निकोर जी// स्नेह यु ही बनाए रखें //सादर

Comment by ram shiromani pathak on June 27, 2013 at 9:11pm

हार्दिक आभार आदरणीय भाई विजय मिश्र जी //स्नेह यु ही बनाए रखें //सादर

Comment by विजय मिश्र on June 27, 2013 at 5:24pm
श्रध्येय राम शिरोमण जी , भाई गजब की रचना रची , देखिए ,ज्ञान गंगा की धार बह निकली , आपने श्रेष्ठों को अभिव्यक्त होने का सुअवसर दिया .बधाई के पात्र हैं,स्वीकारें.

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