For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

//गजल//यह बारिशों का मौसम

 

2212122221212

 

यह बारिशों का मौसम, कितना हसीन है!

धरती गगन का संगम, कितना हसीन है!

 

जाती नज़र जहाँ तक, बौछार की बहार,

बूँदों का नृत्य छम-छम, कितना हसीन है!

 

बच्चों के हाथ में हैं, कागज़ की किश्तियाँ,

फिर भीगने का ये क्रम, कितना हसीन है!

 

विहगों की रागिनी है, कोयल की कूक भी,

उपवन का रूप अनुपम, कितना हसीन है!

 

झूलों पे पींग भरतीं, इठलातीं तरुणियाँ,

लय तान का समागम, कितना हसीन है!

 

मित्रों का साथ हो तो, आनंद दो गुना,

नगमें सुनाता आलम, कितना हसीन है!

 

हर मन का मैल मेटे, सुखदाई मानसून,

हर मन का नेक हमदम, कितना हसीन है!

 

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 839

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by कल्पना रामानी on June 20, 2013 at 6:04pm

आदरणीय, आशुतोष जी, आपकी जिज्ञासा का समुचित समाधान इस लिंक पर हो जाएगा। यहीं से ही मैंने भी सीखने की शुरुआत की। यह सब सब्र श्रम, लगन और लगातार अभ्यास से ही संभव है। एक दो शब्दों में बताना संभव नहीं। सादर

 

http://www.openbooksonline.com/group/gazal_ki_bateyn/forum/topics/5...

 

आप इस समूह को ज्वाइन कर लें तो और बेहतर रहेगा।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 20, 2013 at 3:19pm

सादर बधाई के साथ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 20, 2013 at 3:18pm

मात्राएँ गिनना हम अब सीख रहे हैं ..पहली पंक्ति में का  में एक मात्र इसलिए है क्या क्यूंकि का पर ज्याद स्ट्रेस नहीं पद रहा है या आर कोई बजह है ..हम चाहते हैं आप मात्राओं का आकलन अपने किन्ही दो शेरो के माध्यम से हमें समझाने का कसष्ट करें ..मैं समझ नहीं पा रहा हूँ की मुझसे गलती कहाँ हो रही है 

जाती नज़र जहाँ तक, बौछार की बहार,

बूँदों का नृत्य छम-छम, कितना हसीन है!

और इस शेर में 

झूलों पे पींग भरतीं, इठलातीं तरुणियाँ,

लय तान का समागम, कितना हसीन है!

Comment by कल्पना रामानी on June 20, 2013 at 1:51pm

आदरणीय मित्रों-जितेंद्रजी, विजय जी, अमन जी,कुंती जी, वीनस जी,राम शिरोमणि जी,बृजेश जी, महिमा श्री जी, रचना को अपना हसीन स्नेह प्रदान करने  के लिए आप सबका हार्दिक आभार। यूँ ही आप सबका स्नेह बरसता रहे।   

Comment by MAHIMA SHREE on June 19, 2013 at 11:16pm

जाती नज़र जहाँ तक, बौछार की बहार,

बूँदों का नृत्य छम-छम, कितना हसीन है!

 

बच्चों के हाथ में हैं, कागज़ की किश्तियाँ,

फिर भीगने का ये क्रम, कितना हसीन है!

 

फिर भीगने का ये क्रम, कितना !....वाह आदरणीया बहुत ही मनमोहक प्रस्तुति .. आपका हर एक  शेर हसीन है! !!! बधाई स्वीकार करें

Comment by बृजेश नीरज on June 19, 2013 at 10:56pm

बहुत ही सुन्दर! हिन्दी गजल के प्रतिमानों की स्थापना में आपका योगदान अतुलनीय है। आपके मेरी बधाई इस रचना के लिए।

Comment by ram shiromani pathak on June 19, 2013 at 10:03pm

आदरणीया कल्पना जी दमदार शानदार ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई //

Comment by वीनस केसरी on June 19, 2013 at 2:29pm

गीत के जैसी मधुर ग़ज़ल हो जाए तो आनंद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है ...

और यहाँ तो विषय और रदीफ़ सब कुछ हसीन है ...

शानदार ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई 

Comment by कल्पना रामानी on June 17, 2013 at 11:13pm

आदरणीय केवल प्रसाद जी, 'मेल'शब्द तो टंकण की त्रुटि से हो गया है। ठीक कर देती हूँ, लेकिन दूसरे शेर में क्या गड़बड़ है, स्पष्ट बताइये। पसंद करने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 17, 2013 at 9:52pm

आ0 रामानी मैम जी, सुन्दर गजल हुई है।
जाती नज़र जहाँ तक, बौछार की बहार,
बूँदों का नृत्य छम-छम, कितना हसीन है!
हर मन का मेल मेटे, सुखदाई मानसून,
हर मन का नेक हमदम, कितना हसीन है!..दोनों शे‘र फिर से देख लें। सादर,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
11 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Saturday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service