For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरे पास है --

वैचारिक विमर्श के विविध रूप में 
काम आने वाला कबाड़ ,
प्रेम के अप्कर्श का पथ ,
पिछला बाकी सनसनाता डर ,
संजीदा होती साँसें ,
वही पुरानी मजिलें , और 
प्रतिभावान काया,

मुझे --

करनी है, सार्थक पहल , 
नाक की लड़ाई के लिए ,
पूछने है सवाल, चुपके चुपके ,
लयात्मक खुश्बू के लिए ,
करने है खारिज़ व बेदखल ,
व्यवस्था विरोध के स्वर ,
चलना है साथ-साथ ,
जवाब की तलाश मे ,

मैं जानता हूँ --

जब बदलेंगे रास्ते ;
तो जुड़ेंगे तार ,
होगी साझा हितों में ,
कामयाबी की वारिश ,
रहेगी नब्ज़ पर अंगुली ,
और टुकड़ों - टुकड़ों में गहराई ,
होगा आज़ादी का अहसास ,
तिनके - तिनके सुख के लिए ,

अश्क
१० जून १९९९

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 532

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 18, 2013 at 1:42am

आपकी रचनाधर्मिता सार्थक है, आदरणीय अशोक कत्यालजी.

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 11, 2013 at 3:46pm

मस्तिष्क में पल पल कुलबुलाते विचारों के द्वन्द, और उनके सजग एहसास के साथ जीवन पथ पर सामंजस्य बैठाते हुए कामयाबी की मंजिल की ओर बढ़ने की इच्छा,,,समेटी सुन्दर रचना 

जब बदलेंगे रास्ते ;
तो जुड़ेंगे तार ,
होगी साझा हितों में ,
कामयाबी की वारिश ,..............इस पंक्ति नें विशेष रूप से प्रभावित किया 

बहुत बहुत बधाई इस अभिव्यक्ति के लिए आ० अशोक कत्याल जी 

Comment by ram shiromani pathak on April 9, 2013 at 7:40pm

आदरणीय अशोक  जी, क्‍या बात है, बहुत ही उम्‍दा लेखन, सादर

Comment by राजेश 'मृदु' on April 9, 2013 at 5:18pm

क्‍या बात है, बहुत ही उम्‍दा लेखन, सादर

Comment by vijayashree on April 9, 2013 at 2:10pm

मुझे --

करनी है, सार्थक पहल , 
नाक की लड़ाई के लिए ,
पूछने है सवाल, चुपके चुपके ,
लयात्मक खुश्बू के लिए ,
करने है खारिज़ व बेदखल ,
व्यवस्था विरोध के स्वर ,
चलना है साथ-साथ ,
जवाब की तलाश मे ,

 

अशोकजी सार्थक रचना .........बधाई !

Comment by coontee mukerji on April 9, 2013 at 9:57am

अशोक कत्याल  जी ,बहुत खूब . अंतिम दोनों पंक्ति उपर के भावों को सार्थक कर दिया है . अति सुंदर .

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 9, 2013 at 9:03am

आदरणीय अशोक कत्याल जी, सादर प्रणाम! ’चलना है साथ.साथ ए
जवाब की तलाश मे’... बहुत सुन्दर कविता, सामाजिक स्वतंत्रता के लिए हम सभी को एक साथ स्वर मिलाना ही होगा। आपको हार्दिक बधाई। सादर,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
yesterday
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Feb 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Feb 28

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service