For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

तोटकाष्टकम् - दुर्मिल वृत छंद का समूह-गायन

सुधीजनो, 

तोटकाचार्य आदिशंकर के प्रथम चार शिष्यों में से थे.  ’आचार्यदेवोभव’ सूत्र के प्रति अगाध भक्ति के माध्यम से समस्त ज्ञान प्राप्त कर आप आदिशंकर के अत्यंत प्रिय हो गये. आगे, आदिशंकर ने बद्रीनाथधाम की स्थापना कर आपको वहीं नियुक्त किया था. 

तोटकाचार्य विरचित तोटकाष्टकम्   --इसे श्रीशंकरदेशिकाष्टकम् भी कहते हैं--   दुर्मिल वृत्त में है. 

तोटकाष्टकम् का आधुनिक वाद्यों के साथ समूह-गान प्रस्तुत है.

विश्वास है, छंद ज्ञान और सस्वर पाठ में सटीक उच्चारण को जानने के क्रम में यह प्रस्तुति रोचक प्रतीत होगी.

तोटकाष्टकं या श्रीशङ्करदेशिकाष्टकम्

विदिताखिल शास्त्रसुधाजलधे महितोपनिषत्कथितार्थनिधे ।
हृदये कलये विमलं चरणं भव शंकर देशिक मे शरणम्॥१॥

करुणावरुणालय पालय मां भवसागरदुःखविदूनहृदम् ।
रचयाखिलदर्शनतत्त्वविदं भव शंकर देशिक मे शरणम्॥२॥

भवता जनता सुहिता भविता निजबोधविचारण चारुमते ।
कलयेश्वरजीवविवेकविदं भव शंकर देशिक मे शरणम्॥३॥

भव एव भवानिति मे नितरां समजायत चेतसि कौतुकिता ।
मम वारय मोहमहाजलधिं भव शंकर देशिक मे शरणम्॥४॥

सुकृतेऽधिकृते बहुधा भवतो भविता समदर्शनलालसता ।
अतिदीनमिमं परिपालय मां भव शंकर देशिक मे शरणम्॥५॥

जगतीमवितुं कलिताकृतयो विचरन्ति महामहसश्छलतः ।
अहिमांशुरिवात्र विभासि गुरो भव शंकर देशिक मे शरणम्॥६॥

गुरुपुंगव पुंगवकेतन ते समतामयतां नहि को अपि सुधीः ।
शरणागतवत्सल तत्त्वनिधे भव शंकर देशिक मे शरणम्॥७॥

विदिता न मया विशदैककला न च किंचन काञ्चनमस्ति गुरो ।
द्रुतमेव विधेहि कृपां सहजां भव शंकर देशिक मे शरणम्॥८॥
 

**********************************

-सौरभ

Views: 2052

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 5, 2013 at 1:25pm

आदरणीय सौरभ जी सादर, इस दुर्मिल गायन में भगवान् शिव शंकर की अति कर्ण प्रिय  स्तुति को क्या डाऊनलोड कर पाना सम्भव है? यदि हाँ तो फिर उपाय भी सुझाएँ. क्योंकि इसे एक दो बार सुनकर मन नहीं भर सकता.सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 5, 2013 at 10:53am

अद्दभुत- अद्दभुत!!मधुर  कर्ण प्रिय आधुनिक वाद्य यंत्रो और मधुर आवाजो के संगम ने संस्कृत के उत्कृष्ट छंदों के साथ पूर्णतः न्याय किया है बहुत पसंद आया देर से सुना, आपके इसे पोस्ट करने के वक़्त बाहर थी इसलिए मिस हुआ आज नूतन जी के कमेन्ट को देख कर ध्यान गया अब तक दो तीन बार तो सुन चुकी हूँ इसका अर्थ समझने की कोशिश में हूँ सुबह सुबह ऐसी भगवान् शंकर स्तुति को रोज सुने तो कितना अच्छा दिन बीतेगा ।ह्रदय से आभार इसे शेयर करने के लिए आदरणीय सौरभ जी ।

Comment by डॉ नूतन डिमरी गैरोला on April 5, 2013 at 9:31am

आदरणीय सौरभ जी ! बहुत आनंद आ गया सुबह सुबह तोटकाष्टम सुन कर ... और उसके बारे में जान कर ... सस्वर छंद की जानकारी ज्ञानप्रद भी है और आध्यात्मिक भी है.... सादर धन्यवाद 

Comment by Ashok Kumar Raktale on March 17, 2013 at 10:30pm

आदरणीय सौरभ जी सादर, अहा आनंद आ गया दुर्मिल सवैये को संगीत के साथ सुनना बहुत ही आनंददायक था.आपका बहुत बहुत आभार.

Comment by mrs manjari pandey on March 17, 2013 at 9:46pm

 आदरणीय सौरभ जी बड़ी ज्ञानवर्धक प्रस्तुति . पढ़  कर ह्रदय में शांति लगी।आपाधापी के दौर में ऐसी रचना की ओर ध्यान जाना ही अद्भुत है बधाई पुनः

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 17, 2013 at 4:55pm

अहोभाग्य! गुरू जी, सस्वर सुनने मे आनन्द चार गुना हो गया! अद्भुत ज्योर्तिमय प्रस्तुति!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 17, 2013 at 3:26pm

सही ध्यान दिलाया, वस्तुतः  सुकृतेऽधिकृते शुद्ध सामासिक शब्द है जिसे टंकित करते समय भूलवश को पूर्ण कर अधिकृते  लिख दिया.

ऑडियो फ़ाइल के स्वर में सुकृतेऽधिकृते ही उच्चारित है.  आपने ध्यान भी दिया होगा.

टंकण दोष के प्रति ध्यान खींचने के लिए आपका सादर आभार, आदरणीया. ..

आपको इस तरह की जानकारी साझा करना रुचिकर लगा, यह जान कर मेरा उत्साह भी बहुगुणित हुआ है.

टंकण दोष में सुधार हो गया है.

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 17, 2013 at 3:08pm

आदरणीय प्रस्तुत पद में एक संशय है... कृपया निवारण करें .

सुकृते अधिकृते बहुधा भवतो भविता समदर्शनलालसता ।
अतिदीनमिमं परिपालय मां भव शंकर देशिक मे शरणम्॥५॥

क्या "अधिकृते" यही शब्द है, क्योंकि इससे दुर्मिल वृत्त ११२ ११२ का पालन नहीं हो रहा है

Comment by ram shiromani pathak on March 17, 2013 at 12:49pm

आदरणीय सौरभ सर ,

मन प्रसन्न हो गया सुनकर, सीखने को भी मिला !

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार आदरणीय. सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 17, 2013 at 11:49am

आदरणीय सौरभ जी, 

बहुत ही मुग्धकारी प्रस्तुति है यह आदरणीय..

दुर्मिल वृत्त की रचनाओं की इतनी सुन्दर गेयता हो सकता है... ये अहसास प्रस्तुत गायन सुनकर ही हुआ.

तोटकाचार्य विरचित तोटकाष्टकम् नें बहुत प्रभावित किया..दुर्मिल आवृति में रचना प्रयास को प्रेरित करने वाली इन सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार आदरणीय. सादर.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
4 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
14 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
17 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
20 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service