For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हरसिंगार की खुशबू हो तुम

मेरे मन के दरख्त की डाली
झुकी झुकी सी, फूलों सी है
लरज लरज कर बाहों जैसी
याद तुम्हारी कर लेते हैं .

अब यादों की बदली से हम
भीग भीग कर सूख रहे हैं,
एक तुम्हारी चाहत ही है
जिसे अभी तक सींच रहे है

एक अंजुरी नयन नीर से,
एक एक पल जैसे हो पीर से
हर पल हरसिंगार की खुशबू
एक दिलासा मन के तीर (किनारा) से

Views: 493

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SUMAN MISHRA on December 17, 2012 at 1:06pm

shukriya rajesh di


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 17, 2012 at 10:08am

अब यादों की बदली से हम 
भीग भीग कर सूख रहे हैं, 
एक तुम्हारी चाहत ही है 
जिसे अभी तक सींच रहे है---प्यारी पंक्तियाँ 

Comment by SUMAN MISHRA on December 17, 2012 at 12:39am

sri shaindra ji shukriya aapka

Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on December 16, 2012 at 9:54pm

अब यादों की बदली से हम
भीग भीग कर सूख रहे हैं, लाजवाब पंक्ति, बहुत ही सुंदर रचना हार्दिक बधाई स्वीकार करें

Comment by SUMAN MISHRA on December 16, 2012 at 1:44pm

अन्जुश्री दी ,,आभार आपका

Comment by SUMAN MISHRA on December 16, 2012 at 1:44pm

अरुण जी....बहुत बहुत शुक्रिया आपका...

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 16, 2012 at 1:21pm

आदरणीया सुमन जी मुझे रचना बेहद पसंद आई, बधाई स्वीकारें.

अब यादों की बदली से हम
भीग भीग कर सूख रहे हैं, लाजवाब पंक्ति.....
एक तुम्हारी चाहत ही है
जिसे अभी तक सींच रहे है   वाह क्या बात है ...   

Comment by Anwesha Anjushree on December 16, 2012 at 12:09pm

साधना है, राह सरल नहीं, पथिक बने रहो।सुंदर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
1 hour ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
1 hour ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
3 hours ago
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक जी सादर अभिवादन  बहुत बहुत धन्यवाद आपका  बहुत अच्छे सुझाव हैं ग़ज़लमें निखार…"
3 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय रिचा यादव जी, बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है। बधाई स्वीकार करें।"
6 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, अति सुंदर ग़जल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई तिलकराज जी, सादर अभिवादन।गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। बहुत सुंदर सुझाव दिया…"
6 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय रिचा यादव जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
6 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. रिचा जी, हार्दिक धन्यवाद।"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई अजय जी, गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।"
6 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, सुंदर ग़जल के लिए बधाई स्वीकार करें।"
6 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service