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कोई फिर भगवान हुआ है

यह रचना उन (ढोंगी ) बाबाओं और गुरुओं के नाम जो अमरबेल से हर गली में  हर रोज उग रहे है .....


कोई फिर भगवान हुआ है
हर घर का दरबान हुआ है 
फैला कर झूठे विज्ञापन
गीता और कुर'आन हुआ है 

विदूषकों के वाग्जाल से 
माया-मंडित इंद्रजाल से 
समझ-बूझ औ' सद्-विवेक का
प्रज्ञा से प्रस्थान हुआ है

कोई फिर भगवान हुआ है.......... 

भौतिकता में उलझे सारे
गुरुओं के आध्यात्मिक नारे
आडम्बर और छद्म-आचरण 
सुनियोजित अभियान हुआ है 

कोई फिर भगवान हुआ है ........

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Comment

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Comment by seema agrawal on September 9, 2012 at 10:15pm

हरविंदर सिंह जी एवं भावेश जी आपका हृदय से धन्यवाद 

भावेश जी आपने  इस प्रकार के लोगों के लिए जो शब्द प्रयुक्त किए  वो बिलकुल उचित हैं //अपनी लच्छेदार बातों के जाल में फंसा कर //

Comment by seema agrawal on September 9, 2012 at 10:10pm

कविता में निहित भावों को सराहने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद उमाशंकर जी 

Comment by seema agrawal on September 9, 2012 at 10:08pm

रेखा जी जबतक देश में शिक्षा के महत्व को दरकिनार किया जायेगा ये सब यूँ ही चलेगा (वैसे  कई पढेलिखे भी इस आडम्बर में श्रद्धा रखते हैं )दिल से शुक्रिया आपको 

Comment by seema agrawal on September 9, 2012 at 10:05pm

"जब तक धरती पर मुर्ख रहेंगे, धूर्तों का पेट भरता रहेगा" आपका कहना ठीक है गणेश जी पर बहुत सी ऐसी परिस्थितियाँ भी होतीं है जो

भोले भाले लोगों को  इनके जाल ने फंसने के लिए बेबस करतीं हैं 

रचना को समय देने और सराहने के लिए शुक्रिया 

Comment by seema agrawal on September 9, 2012 at 10:00pm

आदरणीय लक्ष्मन जी रचना में सन्निहित  भावों को समर्थन देने के लिए आपकी अत्यंत आभारी हूँ ...आपके द्वारा प्रेषित शब्द मेरे लिए बहुत महत्व रखते हैं 

जिसके अंदर शैतान छिपा हुआ है, 

नोटों, मालाओ का कद्रदान हुआ है |...सच कहा  आपने 
Comment by Bhawesh Rajpal on September 7, 2012 at 12:23pm
आज के समय में भी ये विडम्बना ही तो है कि लोग अंध भक्ति करने लगते हैं और उन्हें भगवान् का दर्जा दे देते हैं , और वो चालाक लोग जो अपने आप को संत घोषित करते हैं , लोगों के भोलेपन का लाभ उठाते हैं , अपनी लच्छेदार बातों के जाल में फंसा कर उन्हें अपना गुलाम बना लेते हैं !
बढ़िया रचना ! बधाई ! 
Comment by Harvinder Singh Labana on September 6, 2012 at 8:51pm

Behad Khoobsurat....

Comment by UMASHANKER MISHRA on September 6, 2012 at 7:50pm

विदूषकों के वाग्जाल से 
माया-मंडित इंद्रजाल से 
समझ-बूझ औ' सद्-विवेक का
प्रज्ञा से प्रस्थान हुआ है

कोई फिर भगवान हुआ है.......... 

भौतिकता में उलझे सारे
गुरुओं के आध्यात्मिक नारे
आडम्बर और छद्म-आचरण 
सुनियोजित अभियान हुआ है 

कोई फिर भगवान हुआ है ........बहुत बढ़िया आदरणीया सीमा जी हार्दिक बधाई

Comment by Rekha Joshi on September 6, 2012 at 7:43pm

 आदरणीया सीमा जी 

कोई फिर भगवान हुआ है
हर घर का दरबान हुआ है 
फैला कर झूठे विज्ञापन
गीता और कुर'आन हुआ है ,मालूम नही कब तक भगवान बने ढोंगी बाबा भोले भाले लोगों को बेवकूफ बनाते रहें गे ,बढ़िया रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें 



मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 6, 2012 at 4:14pm

जब तक हम इंसान अपने अन्दर के भगवान् से परिचित नहीं हो जाते ये बहुरूपियें ठगते रहेंगे, कहा भी गया है कि जब तक धरती पर मुर्ख रहेंगे, धूर्तों का पेट भरता रहेगा, एक अच्छी रचना पर साधुवाद |

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