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चंद सिक्कों के लिए नीयत बुरी हो जाएगी

क्या पता ईमान की इतनी कमी हो जाएगी॥

चंद सिक्कों के लिए नीयत बुरी हो जाएगी॥

 

क्या ख़बर थी ज़िंदगी यूं दोगली हो जाएगी।

बात सब इंसानियत की काग़जी हो जाएगी॥

 

सच को मैंने कह दिया सच जब सभी के सामने,

क्या ख़बर थी दोस्तों से दुश्मनी हो जाएगी॥

 

आ रहे है आजकल नेता जी फिर से गाँव में,

लग रहा कोई मुसीबत फिर खड़ी हो जाएगी॥

 

आपको भी आशिक़ी का रोग जब लग जाएगा,

रात दिन तब जागने की बेबसी हो जाएगी॥

 

अब्र1 उसके प्यार के मुझपे अगर बरसे नहीं,

यूं ही आवारा मेरी तष्नालबी2 हो जाएगी॥

 

मुफ़लिसी3, बेरोज़गारी यूं अगर बढ़ती रही,

क़ौम फिर मजबूर होकर नक्सली हो जाएगी॥

 

चाँद “सूरज” गुम हैं तारे तीरगी4 है राह में,

तेरी रहमत5 जो हुई तो रौशनी हो जाएगी॥

 

                        डॉ. सूर्या बाली “सूरज”

1. बादल,  2. प्यास,  3. गरीबी 4. अंधेरा,  5. कृपा

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on November 17, 2012 at 3:21pm

मुफ़लिसी3, बेरोज़गारी यूं अगर बढ़ती रही,

क़ौम फिर मजबूर होकर नक्सली हो जाएगी॥

 सम्भावना है 

बधाई 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 14, 2012 at 11:13am

वाह वाह सर जी
एक एक शेर शानदार है
बेहद उम्दा इस ग़ज़ल के लिए मेरी दिली दाद क़ुबूल कीजिये डॉ साहब
मजा आ गया

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 14, 2012 at 11:03am

मुफ़लिसी, बेरोज़गारी यूं अगर बढ़ती रही,

क़ौम फिर मजबूर होकर नक्सली हो जाएगी॥

पूरी ग़ज़ल ही लाजवाब है मगर इस शे'र ने तो दिल जीत लिया डॉ. साहिब.. वाह..

Comment by satish mapatpuri on July 14, 2012 at 2:29am

क्या पता ईमान की इतनी कमी हो जाएगी॥

चंद सिक्कों के लिए नीयत बुरी हो जाएगी॥

आ रहे है आजकल नेता जी फिर से गाँव में,

लग रहा कोई मुसीबत फिर खड़ी हो जाएगी॥

तारीफ़ करूँ  क्या उसकी , जिसने तुम्हें बनाया ........... क्या बात है डॉ. सूरज साहेब ... क्या बात है ...... सुभान अल्लाह 

Comment by वीनस केसरी on July 14, 2012 at 2:26am

वाह वा .....
हर एक शेर ने लाजवाब किया, कहने को कुछ नहीं बचा

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 13, 2012 at 11:36pm

सच को मैंने कह दिया सच जब सभी के सामने,

क्या ख़बर थी दोस्तों से दुश्मनी हो जाएगी॥

मुफ़लिसी3, बेरोज़गारी यूं अगर बढ़ती रही,

क़ौम फिर मजबूर होकर नक्सली हो जाएगी॥

 आदरणीय सूरज जी ...बिलकुल सटीक हालत को बयाँ करती आप की मोहक गजल काविले तारीफ़ ..नए शब्द भी सीखने को मिले ....आभार 

भ्रमर ५ 

 

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 5:54pm

आदरणीय डॉ सूर्य बाली 'सूरज' जी...
आप तो उस्ताद हैं ग़ज़ल के ..ग़ज़ल पर टिपण्णी करने की मेरी हैसियत नहीं...लेकिन  साहेब मार डाला आपके इस शे'र ने:

सच को मैंने कह दिया सच जब सभी के सामने,

क्या ख़बर थी दोस्तों से दुश्मनी हो जाएगी॥

___हाय हाय  हाय.........कुर्बान !

जय हो आपकी

Comment by Rekha Joshi on July 13, 2012 at 4:03pm

सूरज जी ,

चाँद “सूरज” तारे ग़ायब तीरगी है राह में,

तेरी रहमत जो हुई तो रौशनी हो जाएगी॥,बहुत उम्दा रचना ,बहुत बहुत बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 13, 2012 at 3:59pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल .वाह हर शेर लाजबाब 

Comment by Yogi Saraswat on July 13, 2012 at 12:26pm

आ रहे है आजकल नेता जी फिर से गाँव में,

लग रहा कोई मुसीबत फिर खड़ी हो जाएगी॥

 

आपको भी आशिक़ी का रोग जब लग जाएगा,

रात दिन तब जागने की बेबसी हो जाएगी॥

बहुत सुन्दर अल्फाज़ और अशाओरों से सजी ग़ज़ल है आपकी आदरणीय डॉ. बाली जी !

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