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वो ख़्वाब उज़ागर क्यूँ  किये हमने 

सौ दर्द  ज़िगर को क्यूँ दिए हमने||

 जब करनी थी बातें कई हज़ार

वो लब  चुपके से क्यूँ सिये हमने||

ख़्वाब  बुनते रहे वो ही गलीचा 

 तलवे ये जख्मी क्यूँ किये हमने ||

 ता उम्र करते रहे  उन से  वफ़ा

ये जफ़ा के घूँट  क्यूँ पिए हमने ||

 दे के जहान  भर की दुआ उनको

मिटा दिए सुख के क्यूँ ठिये हमने  

 अश्क तो पलकों में ज़ब्त हो जाते 

 ये सब  हथेली पे  क्यूँ लिए हमने || 

             ********

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 11, 2012 at 10:55am

सुमधुर स्नेह के लिए आभार.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 11, 2012 at 10:40am

प्रिय प्राची जी मेरे शब्द आपके दिल तक पंहुचे आपने सराहा मेरी कलम को और क्या चाहिए "भरी बरसात में भी प्यासा था दिल एक बूँद जो तूने पिलादी कसम से मन को भिगो गई" |आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 11, 2012 at 10:16am
आदरणीया राजेश जी,
ह्रदय से भाव सरिता जैसे बह चली, जो भी पढेगा भीगे बिना रह नहीं पायेगा......
इस खूबसूरत रचना के लिए हार्दिक बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 11, 2012 at 9:12am

आशीष यादव जी तहे दिल से शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 11, 2012 at 9:11am

सौरभ जी आपकी टिपण्णी सर आँखों पर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 11, 2012 at 9:10am

राकेश गुप्ता जी आपके शब्द तो दिल तक पंहुच  गए आपने मेरे शब्दों को सराहा हार्दिक आभार 

Comment by आशीष यादव on July 10, 2012 at 10:46pm

इक आह सी निकल जाती है। बहुत खूब।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 10, 2012 at 10:26pm

आपकी कोशिश पर ह्रुदय से बधाइयाँ.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 10, 2012 at 8:16pm

तहे दिल से शुक्रिया आपको ये ग़ज़ल नुमा रचना पसंद आई अलबेला जी बहुत बहुत आभार मेरा लिखना सार्थक हुआ 

Comment by Albela Khatri on July 10, 2012 at 8:04pm

एक अनदेखी, अनजानी, अलग सी महक फैलाती इस ग़ज़लनुमा रचना में आपने  बहुत उम्दा पंक्तियाँ कही हैं राजेश कुमारी जी........
आपकी जय हो........

अश्क तो  पलकों में ज़ब्त हो जाते 

  ये सब   हथेली पे  क्यूँ लिए हमने ||

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